हे! महासूर्य हे! महाज्योति तुम महातपस्वी कहलाएं

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साध्वी सुव्रतयशा

हे! महासूर्य हे! महाज्योति तुम महातपस्वी कहलाएं

हे! महासूर्य हे! महाज्योति तुम महातपस्वी कहलाएं
तप: साधना अद्भुत तेरी, तीर्थंकर सम गुरुवर पाएं
पांव पांव चलकर के तुमने दिया विश्व को अमृत संदेश
श्रम की ज्योति जले निरन्तर, गण में छाया नव उन्मेष
जन जन के तुम भाग्य विधाता, मंगल स्वास्तिक आज रचाएं
करुणा के तुम महासमन्दर, प्रतिपल बहती करुणा की धारा
कुशल शासना अनुपम तेरी, मिला संघ को दिव्य सितारा
पंचाचार साधना से गण बगियां को महकाएं
गूंज रही है आज धरा पर, अणुव्रत यात्रा की आवाज
ऐसे महाश्रमण को पाकर पुलकित है यह सकल समाज
आरोग्य बोधि की करें कामना, गण धूली को शीष चढ़ाएं