रचनाएं
योग क्षेम वर्ष यह सुखकर, लाया खुशियों का त्यौहार
योग क्षेम वर्ष यह सुखकर, लाया खुशियों का त्यौहार
मां नेमां की दिव्य कुक्षी से, आया जग में राजकुमार।।
वैशाखी यह महिना अनुपम, शुक्ला नवमी धन्य हुई
झूमरजी के घर आंगन में, रत्नों की बरसात हुई
सबसे छोटा बालक मोहन, संयम पथ की डगर बढ़े
पक्का निर्णय कर जीवन का, मुनि सुमेर से नित्य पढ़े
गुरू आज्ञा से उदित-मुदित को, दीक्षित कर लाये गुरुद्वार।।१।।
प्रथम दर्श में गुरु तुलसी ने, देखा भावी का सपना
होनहार मितभाषी अरु, शुभयोगी होगा जग अपना
विनय, समर्पण, सहिष्णुता से, गुरु के दिल को जीत लिया
तुलसी महाप्रज्ञ की कृति ने, मानो सुर संगीत दिया
भिक्षु के एकादश पट्टधर, महाश्रमण है खेवनहार।।२।।
नत मस्तक है श्वेत पंक्तियां, विभुवर ऐसा रंग खिला
महाविदेह सी रचना पाने, गुरु सन्निधि का योग मिला
तेरे उपकारों से गुरुवर, गुलशन यह महकायेंगे
तेरापंथ की यश गाथाएं, युगों-युगों तक गायेंगे
शिक्षामृत का पान कराकर, करते सबका बेड़ापार।।३।।