कण-कण है मुस्काया

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साध्वी मधुस्मिता

कण-कण है मुस्काया

प्रज्ञा निलयं में खुशियों का सागर लहराया।
नई बहारें कुदरत का कण-कण है मुस्काया
उज्जवलतम आचार तुम्हारा प्रेरक बनता है क्षण-क्षण
सौम्यमूर्ति व्यवहार समुन्नत बात-बात में अपनापन
युग अनुरूप प्रशिक्षण प्रवचन सबके मन भाया॥ १॥
स्वाध्यायी बहुश्रुत समयज्ञा सतीशेखर लो वन्दन
आज्ञा मर्यादा गुरुनिष्ठा तप जप से भावित चेतन
उच्च साधना के प्रयोग है कल्पवृक्ष छाया॥ २ ॥
अभिनन्दन की पावन बेला आस्था थाल सजा लाएँ
रहो निरामय बनो शतायु चयन दिवस पर हम गाएँ
चन्देशी, मोदी परिकर यश परचम फहराया॥ ३ ॥
तर्ज - अणुव्रत है सोया