नव इतिहास रचाया है

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साध्वी रक्षितयशा

नव इतिहास रचाया है

रूँ-रूँ में छाया उल्लास, गण में मुसकाया मधुमास
प्रमुख पद महकाया है, नव इतिहास रचाया है।।
अंबर बरसें धरती हरसें, मंगल बेला आई।
चयन दिवस का भव्य नजारा, दिल में खुशियाँ छाई।
वंदन-वंदन लो अभिनंदन, साध्वी गण करता वर्धापन।
कैसा आनंद छाया है, सबको खूब सुहाया है।।
नया राज है, नया ताज है, नित्य नया अंदाज है
महाश्रमण की हीरकणी यह श्रमणी गण सरताज है
चमका गण का भाग्य सितारा, बहे छलाछल अमृतधारा।
अभिनव उत्सव आया है, भिक्षु गण सरसाया है।।
योगक्षेम वर्ष में मिल रही, अमृत शिक्षा रसधार।
छोटी-छोटी सतियों में, भर रहे सद्संस्कार।
वत्सलता की अनुपम मूरत, लगती सबको प्यारी सूरत।
पल-पल तेरा ही साया है, सबका भाग्य संवारा है।।
हर धड़कन में सहज समर्पण के मधुरिम सुर साज
विनम्रता की भव्य नजीर पर हमको अनहद नाज
जुग-जुग जीओ साध्वीप्रमुखा, जय हो जय हो साध्वीप्रमुखा।
अद्भुत रंग जमाया है, कैसा ठाठ लगाया है।।
लय: नीले घोड़े रा असवार...