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अनुशासन एवं वात्सल्य की संगम स्थली
महत्ता वृक्ष की नहीं होती है, उसके बीज की होती है, महत्ता दीपक की नहीं, ज्योति की होती है, भव्यता महल की नहीं उसकी बुनियाद की होती है, ठीक इसी प्रकार वह व्यक्ति सबके लिए आदरणीय, आचरणीय और सम्मानीय बन जाता है। जिनके व्यक्तित्व और कर्तृत्व ने ऊँचाइयों का स्पर्श किया है। इसी श्रृंखला में एक नाम है - साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा जी। उनका जीवन बहुआयामी गुणों से संपूरित है। उनके जीवन में तपस्विता, तेजस्विता, वात्सल्य कूट-कूट कर भरी हुई है।
वे विनम्रता, सरलता, सहजता से ओत-प्रोत मुझे प्रतीत होते हैं। उनके जीवन से संदर्भित कुछ संस्मरण आपके सामने प्रस्तुत कर रही हूं, वे निम्न हैं -
1. बात-बात में आत्मा का दर्शन : सन् 2026 की बात है, मैं सुबह एक दिन प्रथम प्रहर की गोचरी कर साध्वी प्रमुखा श्रीजी के पास जैसे ही मालूम करने जा रही थी। मैंने प्रमुखाश्रीजी के जैसे ही कमरे में झांका तो महाराज ने फरमाया - 'केवल बाहर मत देखो, भीतर भी देखना सीखो'। इससे उन्होंने मुझे बात-बात में ही आत्मा के दर्शन का बोध प्रदान करवा दिया।
2. अनुशासन एवं वात्सल्य से पूरित : सन् 2022 की बात है - बीदासर मर्यादा महोत्सव के बाद जैसे ही मुख्य नियोजिका सबको समय दिला रहे थे, क्योंकि उस समय शासन माता साध्वी प्रमुखा कनकप्रभाजी स्वास्थ्य लाभ के लिए दिल्ली पधारे हुए थे। मैं साध्वी प्रांशुप्रभा प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझ रही थी। उस समय आपने समय दिलाते हुए फरमाया - 'प्रांशुप्रभाजी थारी निर्जरा करयोड़ी ऐली कोनी ज्यावे'। वह वात्सल्य मैं कभी नहीं भूल सकती।
इसी संदर्भ में एक प्रसंग और प्रस्तुत कर रही हूं। सन् 2026 की बात है मातृ हृदया प्रमुखा श्रीजी लाडनूं में मुझे मोबाइल के प्रायश्चित के संदर्भ में पच्चखाण के लिए दिखलाया। उस समय उनका वात्सल्य इतना कि 'आरे और घणा ही काम है' यह साध्वी जयविभाजी महासत्याजी को कहा और मुझ पर वात्सल्य बरसाते हुए छोटा पन्ना ओटण के लिए दिया। यह संस्मरण मेरे लिए अविस्मरणीय बन गया। सन् 2026 की बात है साध्वी संघप्रभाजी महासत्याजी को टाइफाइड हो गया। आपकी इतनी वत्सलता कि आप बिना कहे ही सब कुछ जान लेते हैं। आप समयज्ञ हैं, आपने मुझसे (साध्वी प्रांशुप्रभा) को कहा कि थारे भी इतरो ठीक कोनी, संघप्रभा महासत्याजी के भी बुखार आ रही है, आपने बहुत बार मुझे कहा कि थारे गोचरी वास्ते एक सिंघाड़े की व्यवस्था कर लूं।
इतना आपका माइपणा, कृपा, शुभदृष्टि कभी भी मैं भूल नहीं सकती हूं। आपका इतना स्नेह एवं इतनी आत्मीयता कि जब भी कोई का लोच हो या आप गोचरी करवाकर पधारते तो आपका मुझे ग्रास दिलाना मेरे लिए वह जीवन में शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक संपोषण प्रदान करने वाला है। मैं आपके साध्वी प्रमुखा पंचम मनोनयन दिवस पर आपकी अभ्यर्थना करती हूं एवं आपके लिए मंगलकामना करती हूं कि आपका स्वास्थ्य निरामय रहे एवं हम साध्वियों को आपका दीर्घकाल तक आशीर्वाद एवं सान्निध्य मिलता रहे।