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भक्ति से ही व्यक्ति का होता है कल्याण
युगप्रधान शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी के विद्वान सुशिष्य डॉ मुनि पुलकित कुमारजी ठाणा 2 बेंगलुरु से चेन्नई चातुर्मास के लिए पदयात्रा करते हुए श्री पार्श्व पद्मावती तीर्थ धाम कृष्णगिरी पधारे। तीर्थ धाम के प्रमुख आचार्यश्री बसंत विजयानंद गिरिजी ने मुनिवर को कुशलक्षेम पूछा एवं स्वागत करते हुए कहा देवी मां पद्मावती की कृपा से आज आपका और हमारा मिलना हो रहा है। देवी मां का आशीर्वाद प्राप्त करके ही मैं इस मुकाम तक पहुंचा हूं। उन्होंने पद्मावती देवी के अनेक रूपों की चर्चा करते हुए आगे कहा भक्ति से ही शक्ति जागती है भक्ति से ही व्यक्ति का कल्याण होता है। आचार्य जी ने स्वयं की 21 वर्षीय साधना का अनुभव साझा करते हुए बताया की किस तरह आध्यात्मिक साधना से पद्मावती माता का कृपा प्रसाद मिला और इस तीर्थधाम परिसर का निर्माण हुआ। इस अवसर पर डॉ मुनिश्री पुलकित कुमारजी ने कहा पद्मावती देवी का वर्णन जैन शास्त्रों में 23 वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ प्रभु की अधिष्ठायिका देवी के रूप में प्राप्त होता है। मुनिवर ने उपसर्गहर स्तोत्र का उल्लेख करते हुए कहा जैन धर्म पर आए अनेक संकटों के बादलों को दूर करने में देवी सहायक भी रही है। वर्तमान समय में भी पद्मावती माता के अनेक चमत्कार रूपी प्रभाव जैन धर्म के श्रावक श्राविकाओं के जीवन में नजर आते हैं।