राग के समान कोई दुःख नहीं, त्याग के समान कोई सुख नहीं : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 14 मई, 2026

राग के समान कोई दुःख नहीं, त्याग के समान कोई सुख नहीं : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, तीर्थंकर के प्रतिनिधि आचार्यश्री महाश्रमण जी ने आज ‘काम-राग की दुःखकारिता’ विषय पर उत्तराध्ययन सूत्र के आलोक में मर्मस्पर्शी देशना दी। आचार्यश्री ने भौतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण के बुनियादी अंतर को स्पष्ट करते हुए वैराग्य की भूमिका को जीवन का सर्वोच्च शिखर बताया।
निर्जरा से मिलने वाला सुख ही वास्तविक : आचार्य प्रवर ने फरमाया कि संसार में दो तरह के दृष्टिकोण हैं। एक वह जो इन्द्रिय जनित भोगों में सुख ढूंढता है, और दूसरा वह जो त्याग और संयम में भीतरी आनंद पाता है। कर्मों के कटने (निर्जरा) और मोह के हल्के पड़ने पर भीतर जो अनुकूल संवेदना जागती है, वही वास्तविक सुख है। पदार्थों से मिलने वाला सुख तो नश्वर है और वह अंततः दुःख का ही कारण बनता है।
वैराग्य की कसौटी : पूज्य प्रवर ने आगम के सूत्रों को दोहराते हुए फरमाया कि वैराग्य की भूमिका में चिंतन पूरी तरह बदल जाता है। एक सच्चे साधक के लिए संसार के सारे रागात्मक गीत विलाप जैसे हैं, सारा नाट्य विडंबना है, आभूषण मात्र एक भार हैं और तमाम काम-भोग दुःखों को आमंत्रण देने वाले हैं। संयम में रत साधु के लिए संन्यास देवलोक समान है, लेकिन जिसमें संयम नहीं, उसके लिए यही जीवन नरक तुल्य बन जाता है। गुरुदेव ने 75 वर्ष से अधिक का संयम पर्याय पालने वाले आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी का उदाहरण देते हुए चारित्रात्माओं को स्वावलंबन और निरंतर आत्म-चिंतन की प्रेरणा दी।
साध्वीवर्या के मनोनयन के 10 वर्ष पूर्ण : दिन का विशेष आकर्षण धर्मसंघ की साध्वीवर्या श्री संबुद्धयशा जी का 11वां मनोनयन दिवस रहा। गुरुदेव ने उनके एक दशक के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि वे ज्ञान, दर्शन, चारित्र और सेवा भावना का निरंतर विकास करें। आचार्यश्री ने उन्हें 'चित्त समाधि' बनाए रखने और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए बिना प्रमाद सेवा कार्य करने का पावन आशीर्वाद दिया।इस अवसर पर साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी ने संस्मरणों के माध्यम से भाव अभिव्यक्ति दी। मुनि कमल कुमार जी, शासन गौरव साध्वी कनकश्री जी और समणी नियोजिका ने भी मंगल भावनाएं रखीं। संतवृंद ने सामूहिक रूप से सुमधुर गीत का संगान किया।