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बच्चों को धार्मिक ज्ञान के साथ सुपात्र दान का भी महत्त्व सिखाएं माता-पिता
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण के विद्वान सुशिष्य डॉ मुनि पुलकित कुमार, नचिकेता मुनि आदित्य कुमार का वनियमबाड़ी जैन स्थानक में पदार्पण हुआ। श्रावक समाज को प्रवचन देते हुए मुनि श्री ने कहा जैन धर्म में दान का विशेष महत्व है। प्रत्येक श्रावक के भीतर सुपात्र दान देने की भावना रहनी चाहिए। क्योंकि जैन आगमों में मोक्ष के चार मार्ग बताए गए हैं: दान,शील,तप और भाव। इसमें सबसे पहला है दान देना। मुनि श्री ने दान का महत्व उजागर करते हुए आगे कहा दान देने से शुभ पुण्य कर्म का संचय होता है। अशुभ कर्मों की निर्जरा होती है इसलिए इसे मोक्ष कारक भी कहा गया है।
मुनिश्री ने प्रेरणा देते हुए कहा हर जैन श्रावक का प्रथम कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों को धार्मिक ज्ञान के साथ दान देने के संस्कार जरूर भरें। संयमी गुरुजनों को सुपात्र भिक्षा दान देना जरूर सिखाएं। नचिकेता मुनि आदित्य कुमार ने नमस्कार महामंत्र गीत प्रस्तुत किया। दिलीप बाफना ने स्वागत भाषण किया। तेरापंथ महिला मंडल वनियमबाड़ी से खुशबू सेठिया, मधु दुगड़, सपना आंचलिया, वीना बाफना, वर्षा दुगड, एकता बाफना ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। ज्ञानशाला के विद्यार्थी तन्मय दुगड विहान, नैतिक, रित्विक, सांची, दीतिया, आराध्या, छवि, द्युती जैन आदि ने मनमोहक प्रस्तुति दी। तिरूपत्तूर से विकास संचेती सुशीला संचेती, वनियमबाड़ी स्थानकवासी समाज से मंत्री तेजराज गुलेछा, रिखब सुराणा, भंवरलाल सिंघवी, मीठालाल टोडरवाल, प्रसन्न सुराणा आदि ने मुनि श्री का स्वागत किया।