भावी पीढ़ी का संस्कार निर्माण शिविर का हुआ आयोजन

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केजीएफ।

भावी पीढ़ी का संस्कार निर्माण शिविर का हुआ आयोजन

आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी संयमलताजी आदी ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में आज प्रातः KGF तेरापंथ सभा भवन में भावी पीढ़ी का संस्कार निर्माण शिविर' का भव्य आयोजन हुआ। ज्ञानशाला के नन्हे ज्ञानार्थियों द्वारा -अर्हम अर्हम की वन्दना की मधुर गीतिका से शिविर का मंगल शुभारंभ हुआ। साध्वी संयमलताजी का प्रेरक उद्बोधन में बच्चों को संबोधित करते हुए साध्वी ने कहा Future Bright करना है तो परिश्रम, संयम और संकल्प को जीवन का आधार बनाएं। नैतिकता, प्रमाणिकता और ईमानदारी का हाथ कभी न छोड़ें। राजनीति पर भी आध्यात्मिकता का प्रभाव होना चाहिए। माता-पिता यदि आध्यात्मिक जीवन जीते हैं तो बच्चे स्वयं संस्कारी बन जाते हैं। साध्वी मार्दवश्री जी ने भगवती सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा की - 'बच्चों का संस्कार उसी दिन से शुरू हो जाता है जब वह माँ की कोख में आता है। बच्चों के साथ समय बिताने से बोंडिंग मजबूत होती है। पिता को सम्मान देने से मान-सम्मान बढ़ता है और माता को सम्मान देने से निर्णय शक्ति व चंद्र बलवान होता है।' उन्होंने Calmness, Breathing Focus और Skill Development पर भी प्रकाश डाला। साध्वी मनिषाजी ने BEST का सूत्र को उदाहरणों के साथ B-Breath, E-Eat, S-Sit, T-Talk का महत्व समझाया और कहा - विनम्रता ही जीवन की असली सफलता है। साध्वी रोनकप्रभाजी ने अभिभावकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को डिजिटल युग में संस्कारों से जोड़कर रखें ताकि तकनीक के साथ-साथ नैतिक मूल्य भी मजबूत हों। मुख्य अतिथि इंटरनेशनल ट्रेनर अभिलाषा डांगी ने बताया कि जीवन को शुरू से अंत तक इस तरह प्लान करें कि अंतिम समय में कोई पछतावा न रहे। ध्यान और योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और Effective Communication पर जोर देते हुए बताया कि 'कैसे सुनें और कैसे बोलें' - ये दो कलाएं सीख लेने से हमारा जीवन न केवल सुंदर बल्कि अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है। सही समय पर सही शब्दों का चयन और दूसरों को धैर्य से सुनना, व्यक्तित्व विकास की कुंजी है। इस शिविर में बैंगलुरु के बसवनगुडी, KGF व अन्य समाज के बच्चो ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया।