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अणुव्रत ही ज्ञान का व्यावहारिक रूप
IIPA में 'भारतीय ज्ञान परंपरा और अणुव्रत' पर संगोष्ठी: मुनि उदित कुमार जी,पूर्व सचिव अतुल तिवारी और प्रो. गिरीश्वर मिश्र सहित कई दिग्गज रहे उपस्थित। भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) में आज 'Indian Knowledge System and Anuvrat' विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण और आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में बहुश्रुत मुनि उदित कुमार जी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने प्रेरणादायी विचारों से पूरी सभा को दिशा दी। कार्यक्रम का प्रारंभ अणुव्रत समिति के द्वारा मंगल गीत के संगान से हुआ। अणुव्रत समिति दिल्ली अध्यक्ष बाबूलाल गोलछा ने स्वागत वक्तव्य दिया। बहुश्रुत मुनि उदित कुमार जी ने अपने उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) और अणुव्रत के गहरे अंतर्संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा:'-भारतीय ज्ञान परंपरा केवल ग्रंथों या दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक व्यावहारिक कला है। जब हम इस महान ज्ञान को अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे संकल्पों के माध्यम से उतारते हैं, तो वही 'अणुव्रत' का रूप ले लेता है। आज के पर्यावरण संकट और मानसिक तनाव का एकमात्र समाधान हमारे इसी आत्म-अनुशासन और संयम में छुपा है।' अन्य शीर्ष विचारकों ने भी विषय के व्यावहारिक आयामों पर संक्षेप में अपनी बात रखी। मुख्य अतिथि अतुल कुमार तिवारी, IAS (पूर्व सचिव, स्किल इंडिया)-, प्रो.गिरीश्वर मिश्र (पूर्व कुलपति, MGAHV), प्रो. सुधा सिंह (विभागाध्यक्ष हिंदी, DU), अमिताभ रंजन (रजिस्ट्रार IIPA) कार्यक्रम का सफल संयोजन अनिल धर मिश्रा द्वारा किया गया, जिन्होंने मुनिश्री के पावन विचारों और विद्वानों के इस मंथन को राष्ट्रीय नीतियों के निर्माण के लिए अत्यंत उपयोगी और ऊर्जावान बताया।