गुरु पुष्य नक्षत्र के दुर्लभ संयोग पर महा-अनुष्ठान, गुरु-कृपा को बताया जीवन का वरदान

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गुरु पुष्य नक्षत्र के दुर्लभ संयोग पर महा-अनुष्ठान, गुरु-कृपा को बताया जीवन का वरदान

आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी संयमलताजी ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में तेरापंथ भवन, KGF में गुरु पुष्य नक्षत्र के दुर्लभ योग पर विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी संयमलताजी ने नमस्कार महामंत्र के मंगल उच्चारण से किया। इस अवसर पर उन्होंने गुरु पुष्य नक्षत्र का महत्व समझाते हुए कहा कि 'यह वर्ष का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। ज्योतिष शास्त्र में इसे 'नक्षत्रों का राजा' कहा गया है। गुरुवार को पुष्य नक्षत्र का आना सोने पर सुहागा है'। उन्होंने आगे कहा, 'मान्यता है कि इस योग में किया गया दान, जप, तप, मंत्र-साधना और नया कार्य अक्षय फल देने वाला होता है। इसका पुण्य कभी क्षीण नहीं होता। आज के दिन खरीदी गई वस्तु स्थायित्व लाती है और शुरू किया गया शुभ कार्य बिना बाधा के पूर्ण होता है। साध्वीश्री ने श्रावकों को प्रेरणा देते हुए कहा कि अनुष्ठान करते समय यह संकल्प करना चाहिए कि 'यह जप अनुष्ठान मेरे आध्यात्मिक जीवन को और अधिक पुष्ट करे।' उन्होंने कहा, 'कुंडली में यदि गुरु ग्रह बलवान है तो सब शुभ माना जाता है। गुरु की कृपा-दृष्टि और वरदान से जीवन सार्थक हो जाता है। इसलिए गुरु का हमारे जीवन में सर्वोपरि महत्व है। साध्वी मार्दवश्रीजी ने अनुष्ठान की विधि समझाते हुए दिशा, आसन, स्वर, मुद्रा और स्थिरता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 'गुरु पुष्य योग में मंत्र शीघ्र सिद्ध होते हैं, बशर्ते नियम और शुद्धता का पालन हो।' तत्पश्चात सभी श्रावकों को शरीर का रक्षा कवच करवाकर एक-एक मंत्र का जप
करवाया गया। साथ ही मंत्रों का अर्थ, उनसे होने वाले लाभ तथा शुद्ध उच्चारण की विधि से सभी को अवगत कराया। यह अनुष्ठान निर्विघ्न आनंदपूर्वक सम्पन्न हुआ। इस दुर्लभ योग का लाभ लेकर सभी श्रद्धालुओं ने अपने भीतर नई ऊर्जा, शांति एवं आध्यात्मिक संचार का अनुभव किया। कार्यक्रम में महासभा के कार्यकारिणी सदस्य श्रीमान सा संजयजी बांठिया, बैंगलुरु से विजयनगर के निवर्तमान अध्यक्ष मंगलचन्द कोचर, नवनिर्वांचित अध्यक्ष भँवरलाल मांडोत, दिनेश हिंगड आदि ने अपने वक्तव्य दिया व अनुष्ठान में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। कार्यक्रम में बैंगलुरु, बसवनगुडी, जीवनहल्ली, बंगारपेट, चेन्नई आदि क्षेत्रों के श्रद्धालु की अच्छी उपस्थित रही।