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समर्पण और साधना के ४ वर्ष
तेरापंथ के अमर इतिहास से जुड़ा दिन वैशाख शुक्ला चतुर्दशी। इसी दिन आचार्यप्रवर ने संन्यास ग्रहण किया और ठीक चार वर्ष पूर्व इसी दिन तेरापंथ की नवमी साध्वीप्रमुखा के रूप में साध्वी विश्रुत विभाजी को प्रतिष्ठित किया। विगत चार वर्षों में पहली बार विराट साध्वी समूह के समक्ष यह अवसर आया है। समस्त साध्वी समाज में अपूर्व उत्साह का वातावरण था। प्रातः चार बजे से पूर्व ही वर्धापना की स्वर लहरियां प्रारम्भ हो गई।
लगभग द्विशताधिक साध्वियों ने प्रज्ञा भवन के ऊपर-नीचे से पंक्तिबद्ध हो कर अभ्यर्थना का नया नजारा प्रस्तुत किया। साध्वीवृंद की भावभीनी अनेक स्वर लहरियों से वातावरण सुरम्य बन गया। सुधर्मा सभा में सूर्योदय के साथ ने विशाल साध्वी समाज के साथ आचार्यप्रवर के दर्शन किए। आचार्यप्रवर के आशीर्वाद के साथ ही संतों ने वर्धापना गीत का संगान किया।
प्रमुखाश्री के गौरवपूर्ण जीवन को सुन्दर गीत के द्वारा प्रस्तुत किया। समणीजी की भी सामूहिक प्रस्तुति हुई। मुख्यमुनि प्रवर ने फरमाया कि नवम साध्वीप्रमुखा है, जैसे १ का अंक अखंड होता है, वैसे ही आप गुरुराज की अखंड आराधिका है, आपकी संयम साधना भी अखंड है। आप अखंड आत्मोपासिका है। आत्मदर्शन व गुरुदर्शन की अभीप्सा से निरन्तर अभिस्नात रहती हो और आप अखंड धर्मसंघ की प्रभावना में अखंड रूप से लगी हुई है।
साध्वीवर्याजी ने मंगल भाव प्रकट करते हुए फरमाया कि यह समर्पण की यात्रा का अभिनन्दन है।साध्वीप्रमुखाश्रीजी की प्रगति का मूलमंत्र है- आपका अनुत्तर संयम और अनुत्तर संकल्प शक्ति। आपकी योग साधना के रूप को उजागर करते हुए जीवन के प्रेरक प्रसंग सुनाए और निरामय जीवन की मंगलकामना करते हुए साध्वी समाज को दीर्घकाल तक आपकी शासना प्राप्त हो, यही शुभभाव अभिव्यक्त किए।
साध्वीप्रमुखाश्रीजी ने चार वर्ष की इस यात्रा के अनेक अनुभव साझा करते हुए फरमाया कि गुरुदेव तुलसी ने संयम रत्न प्रदान किया। आ. महाप्रज्ञजी ने जीवन के विकास के सूत्र बताएं और साधना के गुर सिखाएं। वर्तमान में आचार्यश्री महाश्रमणजी का विश्वास, आश्वासन मुझे प्राप्त है। आपकी सुखद सन्निधि में मैं निश्चिंत हूँ। मैं आपकी सन्निधि में आत्मदर्शन चारित्र की निर्मल साधना करती हुई आचार्यप्रवर के इंगित की आराधना करती रहूं। स्वयं को साध्वी समाज के विकास में नियोजित कर सकूं।
सम्पूर्ण साध्वी समाज के अपूर्व उत्साह और अनहद श्रद्धा को देखते हुए परमपूज्य गुरुदेव को रात्रिकालीन मनोनयन कार्यक्रम का अनुरोध किया। अनुमति प्राप्त कर रात्रिकालीन कार्यक्रम तीन दिन तक चला।
चतुर्दशी की पूर्वसंध्या में ही कार्यक्रम का शुभारंभ हो गया। 29-30-1 अप्रैल तक वक्ताओं, गायकों की लम्बी पंक्ति थी। इस महनीय कार्यक्रम में प्रमुखाश्री की वंदना हेतु वक्ताओं और गायकों ने विविध रूप में अपनी प्रस्तुतियां दी। समूह गीत विभिन्न विभागों से संबद्ध थे। अमृतायन साध्वीवृंद, समाधिमरण की साध्वियों का संगान, गुजरात, मेवाड़ी साध्वियों की टोली, लाडनूं के गौरव की वर्धापना के लिए लाडनूं साध्वी समाज, उड़ीसा की साध्वियों, परिचारक वर्ग, समणीवृंद आदि- विविधता वैचित्र्यपूर्ण स्वर लहरियां पूरे परिषद को गुंजायमान कर रही थी। और अनेक एकाकी गायन भी हुए। वक्तव्य की लंबी कतार साध्वी के जीवन के विविध पहलुओं को उजागर कर रही थी। ऐसा अनुभव हो रहा था कि प्रत्येक साध्वी के मन-मस्तिष्क साध्वी प्रमुखा की विशिष्ट छवि अंकित है।
छोटी-बड़ी साध्वियों की टोली ने रोचक व मनमोहक प्रस्तुतियों से साध्वीप्रमुखाश्री जी के जीवन को सतरंगी रूप में प्रस्तुत किया। संवाद के क्रम में अनेक वर्ग जुड़े - बीदासर दीक्षित साध्वीगण, अहमदाबाद- लाडनूं (समुच्चय वर्ग) प्रस्तुति, पार्श्वप्रभा आदि साध्वियों का AI का मनोरंजन कार्यक्रम, मध्यस्थप्रभा आदि साध्वियों की प्रेरणा रस की शानदार प्रस्तुति।
महाराष्ट्र की साध्वियों ने न्यूमरोलॉजी व ज्योतिष के आधार पर आपका गुणानुवाद किया। इसके साथ-साथ अखिल भारतीय महिला मंडल की आकर्षक प्रस्तुति हुई। उन्होंने स्क्रीन पर प्रमुखाश्री जी के गरिमापूर्ण जीवन को बड़े ही सुन्दर तरीके से प्रस्तुत किया। साध्वीप्रमुखाओं की स्वर्ग में होने वाली मीटिंग भावविभोर करने वाली थी। बालोतरा से पधारे युवती मंडल की बहनों ने कव्वाली के माध्यम से साध्वी प्रमुखाश्रीजी के जीवन की सुंदरतम प्रस्तुति दी।
अभिव्यक्ति...
महिला मंडल ने भी अपने भाग्य की सराहना की और एक साध्वीप्रमुखाश्रीजी पर आधारित गीत भी लॉन्च किया। मोदी परिवार में भी अपने कुलगौरव को के लिए अपूर्व उत्साह था। विविध विधाओं में पूरे मोदी परिवार ने उनके बचपन से लेकर तक की जीवनयात्रा को उजागर किया। त्रिदिवसीय कार्यक्रम का विशेष आकर्षण था- विशाल साध्वी समाज की गरिमामय उपस्थिति और वक्ताओं व की सारगर्भित प्रस्तुति। पुरानी और युगीन साध्वियों की रोचक प्रस्तुति और होने वाली 'ओम अर्हम्' की ध्वनि श्रोताओं के उत्साह को मुखर कर रही थी।
त्रिदिवसीय कार्यक्रम में साध्वीप्रमुखाजी के प्रेरणा स्वर –
'यह अभिनन्दन, वर्धापना गुरुदृष्टि का वर्धापना है। तेरापंथ धर्मसंघ में गुरुदृष्टि जिस पर पड़ती है, समूचा संघ उसे अपने सर आंखों पर बिठाता है। पूज्य प्रवर ने जो दायित्व मुझे दिया, उसे मैं पूरी वफादारी के साथ, जिम्मेदारी के साथ निभाते हुए आगे बढ़ती रहूं - यही मेरी भावना है। आचार्यप्रवर ने जब मुझे व्यवस्था दी तब मेरे चिन्तन में एक संकल्प पैदा हुआ कि मुझे साध्वी समाज को तेजस्वी बनाना है, यशस्वी बनाना है। प्रत्येक साध्वी 2 संकल्प करें –
1. मुझे प्रतनु कषायी बनना है।
2. निरतिचार आचार का पालन करना है।
हम गुरुदेव के सपने को साकार करने के लिए संकल्पबद्ध होवें। हम महाव्रतों, समिति, गुप्ति की आराधना में अहर्निश जागरूक रहे।'
इस प्रकार प्रमुखाश्री के प्रेरणा स्वर सुनकर सम्पूर्ण साध्वी-समाज भावविभोर हो उठा। आपका गुणसुमनों से सज्जित जीवन सुनकर और विकासोन्मुख प्रेरणा पाकर साध्वी समाज नतमस्तक है। त्रिदिवसीय कार्यक्रम में अनेकानेक प्रस्तुतियां हुई, फिर भी पचास से अधिक प्रस्तुतिकर्ताओं ने अपना विसर्जन कर, अपनी मौन अभिव्यक्ति की। त्रिदिवसीय कार्यक्रम का कुशल संचालन साध्वी प्रबुद्धयशाजी एवं साध्वी तेजस्वी प्रभाजी ने किया।
आचार्यप्रवर ने आशीर्वाद के रूप में फरमाया कि हमारे धर्मसंघ में साध्वी समाज की सुन्दर व्यवस्था के आज के दिन मैंने शासनमाता के स्थान की पूर्ति करने के लिए साध्वी विश्रुत विभाजी की नियुक्ति की। सम्पूर्ण समाज, समणियों आदि में महत्त्वपूर्ण कार्य इनके होने से आचार्यों को कार्य करने में सुविधा हो जाती है।
साध्वीप्रमुखाजी दिमाग व समर्पण दोनों क्षेत्रों का सुयोग है। गुरु की उपज, दिमाग सूझबूझ सब महत्त्वपूर्ण है। आजकल CA, Dr, PhD करके पढ़ी-लिखी साध्वियां आती है, उन्हें संभालना, दिशा-निर्देश देना आदि काम में कहीं कोई कमी नहीं रखती हैं। मुझे तो पढ़ी-पढ़ाई, गढ़ी-गढ़ाई, जमी-जमाई साध्वीप्रमुखा मिली है। पहले समणी नियोजिका, फिर मुख्य नियोजिका और अब साध्वीप्रमुखा के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आगम काम से भी जुड़े हुए है, धर्मसंघ की खूब प्रभावना करते रहे। साधना अच्छी चले, स्वास्थ्य अनुकूल रहे। आशीर्वाद प्रदान कर...
आचार्य प्रवर ने ऊर्जाभरा आशीर्वाद प्रदान किया।