तुलसी गुरु के गुण गाएंगे...

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मुनि कमल कुमार

तुलसी गुरु के गुण गाएंगे...

तुलसी गुरु के गुण गायेंगे
वर्षा दिन आज मनाएंगे ॥टेक॥
माता वदना के सुत प्यारे
झूमर कुल के थे उजियारे
जन जन को आज बताएंगे ॥१॥
कालू गुरु कर संयम पाया
सुश्रम कर जीवन सरसाया
कैसे हम उसे भुलाएंगे ॥२॥
संयम में जागरूक पल-पल
अध्ययन अध्यापन क्रम निर्मल
बलिहारी उनकी जाएंगे ||३||
तलस्पर्शी आगम ज्ञान किया
कालूगणी ने गणभार दिया
शासन का भाग्य सराएंगे ||४||
गण को नूतन आयाम दिये
कितने-कितने नव काम किये
कैसे उनको बिसरायेंगे ||५||
बाह्याभ्यन्तर व्यक्तित्व अजब
थी सूझ बूझ भी बड़ी गजब
पल-पल हम स्मृति मे लायेंगे ||६||
है शक्ति पीठ का पावन स्थल
श्रद्धालु को मिलता संबल
सबको ऐसा समझाएंगे ||७||
हम महाश्रमण गुरू आभारी
जिनकी करूणा सब पर भारी
सविनय हम शीश नमाएंगे ||८||
तुलसी-तुलसी नित स्मरण करो
पग-पग पर प्रतिपल विजय वरो
अन्तर मन से हम ध्याएंगे
तन्मय बन रटन लगाएंगे ||९||
तर्ज – ओम पार्श्व प्रभु