आचार्य भिक्षु की संयम साधना अनुत्तर

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आचार्य भिक्षु की संयम साधना अनुत्तर

आचार्य श्री भिक्षु समाधि स्थल संस्थान में प्रतिमाह की भांति आयोजित भिक्षु भक्ति कार्यक्रम मुनि चैतन्य कुमार 'अमन' के निर्देशन में हुआ। इस अवसर पर ब्यावर से बाल कलाकार समृद्ध जैन ने अपनी सुमधुर संगीत की स्वर लहरियां प्रस्तृत की। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुनि अमनकुमार जी ने अपने सम्बोधन में कहा आचार्य भिक्षु की संयम साधना अनुत्तर थी। वे विरले ही संत थे जिन्होंने सदैव संयम को महत्त्व दिया। जिस भवन की नींव जितनी मजबूत होती है। वह भवन उतना ही ऊंचाई को प्राप्त हो सकता है। तेरापंथ धर्मसंघ की नींव में तप-त्याग और संयम का भाव भरा है। आचार्य भिक्षु का जीवन संयम से ओत प्रोत था। मुनि अमन कुमार जी ने बताया आचार्य भिक्षु की आचार निष्ठा, सिद्धान्तनिष्ठा, मर्यादानिष्ठा, संयमनिष्ठा, अनुशासननिष्ठा बेजोड़ थी। साधना के क्षेत्र में संयम सर्वोपरि होता है। संयमी व्यक्ति ही पूज्यता को प्राप्त हो सकता है। संयम के अभाव में समाज राष्ट्र और अन्तराष्ट्रीय स्तर पर शांति की स्थापना सम्भव नहीं अतः संयम से विश्व शांति की स्थापना हो सकती है। इस अवसर पर अहमदाबाद तेरापंथी सभा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राकेश सिपानी का संस्थान की ओर से दुपट्टा मोमेन्टों प्रदान कर डा. बी. आर. शर्मा एवं व्यवस्थापक महावीरसिंह ने स्वागत अभिनंदन किया। बी. के. कल्याण, प्रकाश जैन, प्रवीण जैन, विजय जैन ने बाल कलाकार समृद्ध जैन को दुपट्टा व मोमेन्टों प्रदान कर स्वागत अभिनंदन किया।