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भिक्षु चेतना वर्ष के उपलक्ष्य में 'तेरापंथ मेरा पंथ' कार्यशाला का आयोजन
तेरापंथ सभा भवन में शासन श्री साध्वी कंचनप्रभा जी, शासन श्री साध्वी मंजूरेखा जी आदि ठाणा ५ के सानिध्य में 'तेरापंथ मेरा पंथ' कार्यशाला का शुभारंभ नवकार महामंत्रोच्चार के पश्चात् कुर्ला तेरापंथ महिला मंडल ने मंगलाचरण किया। तेरापंथ सभाध्यक्ष ललित डांगरा ने समागत जनमेदिनी के स्वागत में विचार रखे। धर्म सभा को प्रेरणा प्रदान करते हुए शासन श्री साध्वी कंचनप्रभा जी ने कहा— जैन तत्वदर्शन, दान-दया, सांसारिक व लोकोत्तर व्यवहार को भगवान महावीर की वाणी के आधार पर जन-जन को गहराई से समझाया। उन्होंने कहा— गृहस्थ जीवन जीने वाला व्यक्ति पूर्ण अहिंसक नहीं बन सकता पर अपना दृष्टिकोण सही समझे। हिंसात्मक व्यवहारों को यथार्थ समझना आवश्यक है।
शासन श्री साध्वी मंजूरेखा जी ने कहा तत्वज्ञान हमारा प्राण है। तत्वज्ञान आगमों का सार है। भगवान महावीर ने संवर निर्जरा का जो बोध दिया वह हमारी साधना का लक्ष्य है। आचार्य भिक्षु ने कहा पंचेन्द्रिय के पोषण के लिए अगर एकेन्द्रिय की हिंसा को हिंसा ही कहा जाता है। लौकिक दान तथा लोकोत्तर दान को व्याख्यायित करते हुए, तेरापंथ को प्रस्तुत किया तथा साध्य और साधन के बारे में बताया। श्राविका उपासिका आशा गुंदेचा ने आचार्य भिक्षु के सम्पूर्ण सिद्धान्तों पर अच्छी तरह विस्तार से प्रकाश डाला। संयोजकीय वक्तव्य के साथ राजकुमार चपलोत ने कार्यक्रम की शुरुआत की। महासभा के पूर्व मंत्री रमेश सुतरिया, मुंबई सभा अध्यक्ष माणक धींग, मुंबई सभा के पूर्व अध्यक्ष नरेन्द्र तातेड़, महिला मण्डल कुर्ला की पूर्व अध्यक्षा भावना डागलिया, आदि ने विचार रखे।विशेष हस्तीमल सुतरिया, ट्रस्ट अध्यक्ष सतीश महेता, ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाएं, महिला मण्डल संरक्षिका, सुरेश हिंगड़ ने अध्यक्षीय भाषण, विकास हिंगड़ ने आभार ज्ञापन किया। साध्वी वृन्द ने सुन्दर गीत से कार्यशाला में रंग भर दिया तथा तत्वज्ञान परक गीत ने एक सुन्दर माहौल प्रस्तुत किया।