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ज्ञानशाला वार्षिकोत्सव का आयोजन
तेरापंथ सभा भवन, KGF में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी संयमलताजी आदि ठाणा-4 के सान्निध्य में ज्ञानशाला वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया। साध्वी संयमलताजी ने ज्ञानशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "आचार्य तुलसी का यह महान उपक्रम ज्ञानशाला संस्कारों की फुलवारी है। जो समाज, देश और राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य है। साध्वीश्रीजी ने आगे कहा कि सुसंस्कार हमारे जीवन की धरोहर हैं, सफलता की चाबी हैं। स्वस्थ व्यक्ति और समाज निर्माण का सपना संस्कारों के साथ ही साकार होता है। बच्चों में संस्कारों की खाद, विनम्रता का विटामिन, अनुशासन का ओज, सहनशीलता की सीरप देकर उन्हें देश का उज्ज्वल भविष्य बनाती है ज्ञानशाला। साध्वीश्री ने सत् संस्कारों को पल्लवित, पुष्पित करने के लिए ज्ञानार्थियों को जहां शाकाहार-मांसाहार भोजन साथ में होता है, वहां खाना नहीं खाने, यथासंभव नहीं जाने का संकल्प दिलवाया। हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को स्वस्थ, सुरक्षित रखने के लिए MOBILE TV का कम से कम उपयोग करने की प्रेरणा प्रदान की। साध्वी रौनकप्रभाजी ने अथक श्रम कर बच्चों की सुंदर प्रस्तुति करवाई। बच्चों ने रोबोट और मूर्तियों द्वारा कर्म की THEORY पर रोबोटिक प्रस्तुति दी। (DIRECTION IS MORE IMPORTANT THAN SPEED) मस्ती की पाठशाला की रोचक प्रस्तुति हुई। बच्चों का कहना है की ज्ञानशाला से जुड़ने से हमारी दशा और दिशा ही बदल गयी है। इसलिये अगर बच्चों को सुसंस्कारी बनाना है तो अपने बच्चों को ज्ञानशाला अवश्य भेजे। सभी प्रशिक्षिकाओं का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का सुंदर संचालन कमलेश हिंगड ने किया।