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अनुष्ठान से मिलती है ऊर्जा
तेरापंथ भवन में शासनश्री साध्वी कंचन प्रभाजी एवं शासनश्री साध्वी मंजूरेखाजी आदि ठाणा-5 के पावन सान्निध्य में एक विशेष अनुष्ठान सम्पन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि जप एवं अनुष्ठान के दौरान सायन कोलीवाडा के साधकों ने पूर्ण एकाग्रता एवं स्थिरता का परिचय दिया। सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, साधना और भक्ति से ओत-प्रोत हो गया। इस अवसर पर शासनश्री साध्वी कंचन प्रभाजी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि अनुष्ठान आत्मशुद्धि और ऊर्जा प्राप्ति का प्रभावी माध्यम है। अनुष्ठान के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मकता, शांति और आत्मबल का विकास कर सकता है। शासनश्री साध्वी मंजूरेखाजी ने कहा कि अनुष्ठान से व्यक्ति के जीवन में नई चेतना और जागृति का संचार होता है। नियमित साधना और जप से प्रज्ञा का विकास होता है तथा मन की चंचलता पर नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है।
संतवाणी में यह भी बताया गया कि ऐसे अनुष्ठानों में अत्यंत गहन साधना होती है, जिससे बहुत बड़ी कर्म निर्जरा संभव होती है। यही कारण है कि अनुष्ठान व्यक्ति, परिवार और समाज में शांति एवं सद्भाव का आधार बनते हैं। कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगल मंत्रोच्चार से हुआ तथा लोगस्स के पाठ के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। यह जानकारी तेयुप अध्यक्ष सुनिल दुग्गड़ ने दी ।