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विशेष साधना शिविर में कन्याओं ने सीखे गुर
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्रीजी के पावन सान्निध्य में स्थानीय महिलामंडल ने इस शिविर का समायोजन किया। उपस्थित कन्याओं को संबोधित करते हुए साध्वी निर्वाणश्रीजी ने ओजस्वी वाणी में कहा-जीवन में ज्ञान का मूल्य है। पर आचार की पवित्रता उससे भी अधिक मूल्यवान है। जीवन में सदसंस्कारों की धरोहर को संजोकर विकास करे। द्वितीय सत्र में साध्वीश्री ने कन्याओं की जिज्ञासाओं का सटीक समाधान प्रस्तुत किया। शिविर का निर्देशन करते हुए डा. साध्वी योगक्षेमप्रभाजी ने प्रभावी प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने कहा- आज मुंबई के अनेक क्षेत्रों से कन्याएं यहां उपस्थित हैं। कन्याओं के सामने विकास के अनेक अवसर हैं तो चुनौतियां भी कम नहीं। सही वक्त पर सही निर्णय के साथ आगे बढ़ना है। साध्वी लावण्यप्रभाजी व साध्वी मधुरप्रभाजी ने प्रेरणा गीत के माध्यम से कन्याओं को आगे बढ़ने की सीख दी। प्रेक्षा प्रशिक्षक अंजू बाफना ने कन्याओं को मोटिवेशनल टिप्स देते हुए ध्यान के प्रयोग करवाए। ते.म.मं.घाटकोपर की अध्यक्ष मंजू बडाला ने स्वागत भाषण में कहा- परिसीमन के पश्चात प्रथम बार इतनी कन्याओं को देखकर मैं भावविभोर हूं। तेरापंथ कन्या मंडल की संयोजिका प्रेक्षा बाफना ने साध्वीश्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।