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मुमुक्षु बहन का हुआ सम्मान
आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी संयमलताजी आदी ठाणा-4 के सान्निध्य में मुमुक्षु बहन का स्वागत सम्मान हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत महिला मंडल की बहनों द्वारा सुंदर मंगलाचरण की प्रस्तुति से हुआ। स्वागत भाषण- सुमन बांठिया ने दिया। दीक्षार्थिनी बहिन सुमन बैद का परिचय कमलेश हिंगड़ ने दिया। साध्वी संयमलताजी ने कहा- दीक्षा एक संकल्प है। दीक्षा एक आत्मशुद्धि का त्यौहार है। सत्य, शिव, सुंदर का सोपान है दीक्षा। दीक्षा वेश परिवर्तन नहीं, हृदय परिवर्तन है। दीक्षा दिखावा नहीं, दर्शन है। प्रदर्शन नहीं, प्रयोग है। वैरागिन बहन के भीतर वैराग्य दीप को सदा प्रज्ज्वलित रखना और आत्मदर्शन की दिशा में अपनी शक्ति का यथासंभव नियोजन करते हुए चतुर्मास संघ एवं संघपति की इंगित की आराधना करते रहें। आप सेवा, समर्पण, साधना के द्वारा अभीष्ट मंजिल को प्राप्त करें।
साध्वी मार्दवश्रीजी ने कुशल संचालन करते हुए कहा वीर व्यक्ति ही संयम पथ का अनुसरण करता है। रत्नों को पहचानने के लिए अपनी इच्छाओं को गुरु चरणों में समर्पित करना चाहिए, जिससे हम व मोक्ष रूपी माला का वरण कर सकते हैं। दीक्षार्थिनी सुमन बैद ने कहा - _'जीवन में अंतिम मंजिल व मोक्ष को प्राप्त करने का सरल और सुगम उपाय दीक्षा है। चारित्र को पाना जीवन को सफल बनाना है। गुरू महातपस्वी के करकमलों से संयम को पाकर मैं शर्त सुख का अनुभव करूंगी। मंजू लुणिया ने संयमजीवन की शुभभावना व्यक्त की।