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व्यक्तित्व विकास कार्यशाला का आयोजन
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि अनंतकुमारजी एवं मुनि जैनमकुमार जी के सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशन में तेरापंथ युवक परिषद इचलकरंजी के द्वारा व्यक्तित्व विकास कार्यशाला LIFE MANTRA - मै क्या करूं? आयोजन तेरापंथ भवन में हुआ। मुनि अनंतकुमारजी ने कार्यशाला में अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि हमारे जीवन के अनेक कोण होते हैं उन सब को मिलने पर हमारा संपूर्ण जीवन बनता है। जैसे हम देखते हैं कि भारत देश विभिन्न संस्कृति और अलग-अलग राज्यों से मिलकर बना वैसे ही हमारा जीवन है। हम अपने जीवन में शारीरिक मानसिक व्यवसायिक पारिवारिक एवं आध्यात्मिक इन सब दृष्टि से श्रेष्ठ बनने का प्रयास करें यही इस कार्यशाला का उद्देश्य है। हम अपने जीवन में शारीरिक दृष्टि से स्वस्थ बने सामाजिक दृष्टि से समाज एवं संघ के प्रति कुछ दे सके, व्यावसायिक दृष्टि से स्वयं की बुद्धि एवं प्रज्ञा के द्वारा कुछ नया करके अपने व्यवसाय में निखार लाएं। पारिवारिक दृष्टि से हम रिश्तो को बचाते हुए मानसिक शांति के साथ अध्यात्म की ओर आगे बढ़े तब जाकर हमारा जीवन परिपूर्ण बन सकता है। इस कलयुग में हमें मानव जन्म मिला है जैन धर्म मिला है, तेरापंथ मिला है, आचार्यश्री महाश्रमणजी जैसे महान गुरुओं का सानिध्य मिला है तो हम अपने जीवन में निखार लाने का प्रयास करें। मुनिश्री ने कार्यशाला में उपस्थित दंपतियों के लिए विशेष मंत्र जप आराधना करवाई और स्वयं का निरीक्षण के लिए अनेक प्रश्नों के माध्यम से स्वयं मूल्यांकन का एक बहुत ही रोचक मानक प्रस्तुत किया। लगभग 3 घंटे चली इस कार्यशाला में सब लोगों ने जागरूकता के साथ और मनोभाव के साथ स्वयं को जोड़ै रखा। मुनि जैनमकुमार जी ने मैं क्या करूं? जिससे मेरा जीवन अच्छा बने श्रावकत्व में निखार आये इसके बारे में प्रेरणा दी। तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष अनिल छाजेड़ ने उपस्थित संभागियों का स्वागत करते हुए अपने विचार प्रस्तुत किये।कार्यक्रम का संचालन एवं आभार ज्ञापन तेरापंथ युवक परिषद के मंत्री अंकुश बाफना ने किया।