संस्कार निर्माण शिविर का शुभारंभ

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साउथ कलकत्ता।

संस्कार निर्माण शिविर का शुभारंभ

जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के तत्वावधान में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमारजी ठाणा-3 के सान्निध्य में साउथ कलकत्ता श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा पंचदिवसीय संस्कार निर्माण शिविर* का आयोजन महावीर सेवा सदन, जोका में किया गया। पंचदिवसीय संस्कार निर्माण शिविर के उद्‌घाटन सत्र में उपस्थित शिविरार्थियों व श्रोताओं को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा - आज के भौतिक व आधुनिक युग में व्यक्ति का चिंतन तेजी के साथ बदल रहा है। ऐसी स्थिति में संस्कारों व संस्कृति के संरक्षण के लिए शिविरों की उपयोगिता निर्विवाद व असंदिग्ध है। जिस प्रकार सुबह की शुरुआत मंगलमय होने से पूरा दिन मंगलमय होता है उसी प्रकार जीवन की शुरुआत बचपन संस्कारित होने से पूरा जीवन सुखमय बन जाता है।
संस्कार जीवन-का पहला पाठ, संपदा व धरोहर है। जो संस्कार बचपन में आते है वह पचपन में नहीं आते है। संस्कार दो प्रकार के होते हैं- नैसर्गिक व अधिगमज । संस्कारों के निर्माण में पूर्वभव, माता - पिता, मित्रों व गुरुजनों के संस्कार निमित्त होते हैं। शिविर में 'शि' का अर्थ शिक्षा,' वि' का अर्थ विवेक व 'र' का अर्थ है रसमय बनना । अर्थात शिविर में शिक्षा और विवेक को प्राप्तकर जीवन को रसमय व संस्कार मय बनाया जा सकता है। शिविर में भाग लेने वाले सभी बालक शिविर में अनुशासन, दिनचर्या, व्यवस्था के प्रति जागरूक रहते हुए ज्ञान व संस्कारों का अर्जन करते रहें। धर्म के संस्कार जीवन को पवित्र व नैतिक बनाता है। इस अवसर पर मुनि कुणाल कुमारजी ने सुमधुर गीत प्रस्तुत किया। स्वागत भाषण सदन के संस्थापक अध्यक्ष जसवंतसिंह मेहता ने दिया। साउथ कलकत्ता श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के निवर्तमान अध्यक्ष बिनोद कुमार चोरड़िया, महावीर सेवा सदन कि अध्यक्ष विजय सिंह चोरड़िया, संस्कार निर्माण शिविर के प्रशिक्षक उपासक सुधांशु चण्डालिया, शिविर के राष्ट्रीय सह-संयोजक रवि छाजेड़, स्थानीय संयोजक नवीन दुगड़ ने शिविर के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम का संचालन मुनि परमानंद ने किया। इस अवसर पर अच्छी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।