गुरुवाणी/ केन्द्र
सक्सेस के नशे और ईगो से दूरी ही असली लाइफस्टाइल है : आचार्यश्री महाश्रमण
जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, महातपस्वी, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी ने जैन विश्व भारती परिसर की भव्य सुधर्मासभा में “मनुष्य जन्म सुलब्ध बने” विषय पर उत्तरज्झयणाणि आगम के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान किया। पूज्य प्रवर ने गृहस्थों और युवाओं को साधु-संवाद की सार्थकता समझाते हुए जीवन को दिखावे से दूर रखने का पाठ पढ़ाया।
संवाद की सार्थकता: सफलता से कहीं बड़ा है जीवन का 'सुफल' होना– आचार्य प्रवर ने रोज़मर्रा की बातचीत और जीवन के असली लक्ष्यों का गहरा विश्लेषण किया।
१. साधु से बातचीत बदल देती है लाइफ : गृहस्थ दिनभर में कई लोगों से बातें करता है, पर जब उसे किसी संत से धार्मिक चर्चा करने और संबोध पाने का अवसर मिलता है, तो उसका वार्तालाप सफल हो जाता है। साधुओं का आपस में तत्व बोध और अच्छी शिक्षा के लिए किया गया संवाद भी श्रेष्ठ है।
२. उपलब्धियों का न करें मिसयूज़ : साधना से कई लब्धियां और सिद्धियां मिल सकती हैं, पर मुख्य अचीवमेंट वीतरागता, निष्कषाय भाव और समता है। साधु हो या गृहस्थ, किसी को भी अपनी शक्तियों या योग्यताओं का अनावश्यक प्रदर्शन और दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।
३.सबसे बड़ा भाई है धर्म : त्याग और संयम मय जीवन जीने वाला व्यक्ति धर्म को पाकर सनाथ हो जाता है। यदि हम सच्चे दिल से जिन धर्म की आराधना करें, तो धर्म हमारे जीवन में सबसे बड़ा भाई और संकट में सबसे बड़ा मददगार बनकर साथ खड़ा होता है।
तीर्थंकर और केवली का भेद तथा आचार्य भिक्षु का संकल्प– शांतिदूत ने आगम के आलोक में आध्यात्मिक मार्ग को रेखांकित किया।
१. तीर्थंकरों की पुण्य वत्ता : तीर्थंकर और केवली दोनों ही वीतराग होते हैं, लेकिन तीर्थंकरों की पुण्य वत्ता विशेष होती है। वे समाज कल्याण के लिए स्वयं 'प्रवचन' (देशना) देते हैं जिससे लाखों को लाभ मिलता है, जबकि केवली के लिए व्याख्यान होता है। आचार्य श्री तुलसी और आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के प्रवचनों से भी अनगिनत लोगों का कल्याण हुआ।
२. तेरापंथ धर्मशासन की नींव : सम्यक् ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप की आराधना से ही मानव जीवन सुफल बनता है। आद्य आचार्य श्री भिक्षु ने कंटालिया गांव में जन्म लेकर धर्म के मार्ग पर कदम बढ़ाए और नव्य भव्य दीक्षा लेकर एक नए पंथ की शुरुआत की, जिससे आज का तेरापंथ धर्मशासन संचालित हो रहा है। पूर्व मंत्री सत्येन्द्र जैन की उपस्थिति और महिला मंडल का 'शिखरोत्सव'– मंगल कार्यक्रम में विशेष रूप से दिल्ली के पूर्व कैबिनेट मंत्री सत्येन्द्र जैन उपस्थित हुए और अपनी भावाभिव्यक्ति देकर आचार्यश्री से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसके साथ ही, अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल द्वारा ‘शिखरोत्सव’ कार्यक्रम का मंचीय उपक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर मंडल की संरक्षिका पुष्पा बैंगानी, राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमन नाहटा व सुमति चंद गोठी ने अपने विचार रखे। आचार्यश्री ने अपने कर-कमलों से मुनि निकुंज कुमार जी व मुनि आगम कुमार जी को महिला मंडल के छह वर्षीय पाठ्यक्रम से जुड़े प्रमाण पत्र प्रदान किए और स्वाध्याय को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए ज्ञान क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। साध्वी जिन प्रभा जी और साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुत विभा जी ने भी अपने उद्बोधन में 'आचार्य श्री तुलसी शिक्षा परियोजना' के तहत तैयार हो रहे तत्वज्ञ श्रावक-श्राविकाओं और साधु-साध्वियों की सराहना की।