दुनिया के झूठे सपोर्ट छोड़ प्रभु को बनाओ अपना परमानेंट नाथ : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 19 जून, 2026

दुनिया के झूठे सपोर्ट छोड़ प्रभु को बनाओ अपना परमानेंट नाथ : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, अखण्ड परिव्राजक, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी ने जैन विश्व भारती परिसर की सुधर्मा सभा में “अनाथ भी बने सनाथ” विषय पर उत्तरज्झयणाणि आगम के माध्यम से अमृत देशना प्रदान की। पूज्य प्रवर ने समाज और युवाओं को 'अकेलेपन' का तात्विक बोध कराते हुए सच्चे आत्मिक सपोर्ट (सनाथता) को खोजने का मार्ग दिखाया। संसार का सबसे बड़ा कड़वा सच : यहाँ सब अकेले हैं – आचार्य प्रवर ने मानव जीवन की अनाथता और रिश्तों की सीमाओं का कड़ा विश्लेषण किया।
१. कोई दुःख नहीं बांट सकता : आगम के अनुसार, इस संसार में आदमी की सबसे बड़ी अनाथता यह है कि कोई भी दूसरा व्यक्ति उसकी आंतरिक वेदना या मानसिक कष्ट को कम नहीं कर सकता। ज्ञाति जन, मित्र वर्ग, बेटे या भाई—कोई भी दुःख को शेयर नहीं कर सकता; मनुष्य को अकेले ही इसे भुगतना होता है।
२. असंभव है बुढ़ापे और मौत से बचना : दुनिया का कोई भी रिश्ता या पावर इंसान को बुढ़ापे और मृत्यु से बचाने की गारंटी नहीं दे सकता। यहाँ तक कि गंभीर बीमारी की स्थिति में एक स्टेज के बाद बड़े से बड़ा चिकित्सक भी पूरी तरह असहाय हो जाता है। इस परिप्रेक्ष्य में देखें तो इस धरा पर हर जीव अकेला और अनाथ है।
दृष्टिकोण हो यथार्थ ग्राही: प्रभु को बनाएं अपना नाथ– शांतिदूत ने दृष्टिकोण की शुद्धता और प्रभु भक्ति के माध्यम से सनाथ होने का व्यावहारिक सूत्र दिया।
१. चीटिंग की वृत्ति का हो अंत : किसी भी बात को समझने के लिए इंसान का दृष्टिकोण ऋजु (सीधा) और यथार्थ को स्वीकार करने वाला होना चाहिए। जीवन में किसी को ठगने की वृत्ति बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।
२. साधुत्व से सनाथता : जो जीवन में संयम स्वीकार कर अहिंसा का पालन करता है, वह संसार के जीवों को अभयदान देकर स्वयं 'नाथ' बन जाता है। यदि कोई खुद को अकेला या अनाथ समझता है, तो वह परमात्मा को अपना नाथ बना ले, उसकी अनाथता तुरंत दूर हो जाएगी। इस संदर्भ में पूज्य प्रवर ने एक प्रेरक गीत का संगान भी किया।
श्रुत पंचमी पर मुख्य मुनि श्री महावीर कुमारजी का 38वां जन्मदिवस– सुधर्मा सभा में श्रुत पंचमी का पावन पर्व भी उल्लास के साथ मनाया गया। आचार्य प्रवर ने बहुश्रुत परिषद के संयोजक मुख्य मुनि श्री महावीर कुमार जी के 38वें जन्मदिवस के अवसर पर उन्हें विशेष पाथेय प्रदान किया। पूज्य प्रवर ने कहा कि मुख्य मुनि अभी तरुणावस्था में हैं। उनकी अच्छी साधना, श्रुत की आराधना और संघीय सेवा निरंतर आगे बढ़ती रहे। उनके उत्तम स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास के लिए मंगलकामना की गई। इस खास मौके पर उपस्थित संत वृंद ने मुख्य मुनि श्री के सम्मान में एक सुंदर बधाई गीत का संगान किया।