रचनाएं
कब से बाट निहारे ....तुलसी
कब से बाट निहारे पधारो गण सरताज
दर्श दिखावो, आश पुरावो महाप्राण गुरुराज।
जीवन तुम्हारा भगवन अजब पहेली,
गीता के कृष्ण मुरारी अद्भुत शैली
आगम के महावीर है तीर्थंकर अंदाज।
ज्योति जलाओ भगवन ह्रदय में हमारे,
मैत्री की पावन गंगा कल्मष परवार
भारत पुण्यधरा को युगप्रधान पर है नाज।
आगम सम्पादन है देन निराली,
साहित्य सरिता ज्ञानामृत की खुशहाली
नई 'सदी' ने पाया मंजुल मनोहर राज।
अणुव्रत की साधना को नमन हमारा,
सुरभित रोशन करता जीवन की धारा
प्रेक्षा प्रज्ञा परिमल है मंजिल का मिजाज।
नया मोड़ नारी जग के हौसलों की जीत है,
जैन विश्वभारती से सारे जग को प्रीत है
यूनिवर्सिटी यूनिक है सफलता का ताज।
पात्रा संस्था मुमुक्षु अनमोल उपहार
समण श्रेणि से हुआ विस्मित संसार
कुर्सी के इस युग में पद विसर्जन सुख ताज।