चंदेरी चंदा प्यारे, माँ वदना के नन्दन

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साध्वी ऋजुयशा

चंदेरी चंदा प्यारे, माँ वदना के नन्दन

चंदेरी चंदा प्यारे, माँ वदना के नन्दन,
तुलसी की यशोगाथा, गाते हैं धरा-गगन ॥
अमृत बांटा जग को, शंकर बन जहर पिया,
युगद्रष्टा ने युग को, नूतन आकार दिया - २
लाखों-लाखों भक्तों, की तुम ही हो धड़कन ॥
तुलसी की यशोगाथा...
सारी दुनियाँ में तुम, चमके बन ध्रुवतारे,
अवदान दिए जो भी, वरदान बने सारे - २
अणुव्रत आन्दोलन का, जग करता अभिनन्दन ॥
तुलसी की यशोगाथा...
स्वर्णिम युग तुलसी का, गणमहिमा महकाई,
पट्टधर महाप्रज्ञ-सी, चिन्तामणि है पाई - २
अनुपम थी वह जोड़ी, याद करे जन-जन ॥
तुलसी की यशोगाथा...
उपकार तेरा कितना, कैसे हम बतलाएं,
इक रसना से अनन्त, गुण कैसे हम गाएं - २
महायोगी महाश्रमण, में होते तव दर्शन ॥
तुलसी की यशोगाथा...
लय - जब कोई नहीं आता...