महामहिम ने मुझे जगाया

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साध्वी विनययशा

महामहिम ने मुझे जगाया

अष्टसम्पदा जिनवाणी की दीप्ति शोभित नवमासन में ॥
श्रद्धा भक्ति का गुलदस्ता अर्पण करते पूज्य चरण में ॥
साधना के शिखर पुरुष को भाव भरा प्रणाम है
तुलसी तुलसी ॐ जय तुलसी जपते आठों याम है
अष्ट सिद्धियों नौ निधियों बसती वदना नंदन में ॥
अणुव्रतों का बिगुल बजाया, प्रेक्षा का जय ध्वज लहराया
जीवन विज्ञान से भाग्य सजाया, नए मोड़ से जग में छाया
दिव्य फरिश्ता तुलसी गुरुवर, उतरा भिक्षु नंदनवन में ॥
कार्यकर्ता अनगिन बनाए, रत्नत्रयी से जग हरसाए
सम्यक्त्व दीप कितने जलाए, पतितों के पावन कहलाए
वाह वाह धन्य धरा सपूत, हम आए तुलसी शरण में ॥
परमपुरुष ने मुझे जगाया, सौभाग्य का सूरज उगाया
साध्वी बना वरदान दिलाया, असीम उपकार छत्र छाया
प्रकाशपुंज तेरा ही सबकुछ, गूंज रही ध्वनि कण कण में ॥
जीवनपथ में हो उजियारा, आशीर्वाद दो गुरूवर प्यारा
निर्मल निश्छल जीवनधारा, चमक उठे किस्मत सितारा
अहम् आत्मा का अभ्युदय, करना मुझको तव शरण में ॥