अखिल विश्व में छाए तुलसी

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शासनश्री साध्वी पानकुमारी (प्रथम)

अखिल विश्व में छाए तुलसी

हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई प्राणवान की पुण्य शरण में।
शत शत शीश झुकाते गुरु को अर्पण करते पूज्य चरण में॥
मानस रूपान के दुलारे झूमरमलजी के मनहारे।
खेदड़ कुल के महासूरज वंदनाजी के नयन सितारे॥
चंदेरी के चाँद सलोने छाए जैन अर्जन सुधोजन में।
अनुभवों की दिव्य सम्पदा रम्य सुरम्य नव उधोत।
जीवन शैली जगमग ज्योति वीरवाणी के जो भवपोत॥
कालगणि से शिक्षा दीक्षा आत्मसमीक्षा क्षण बचपन में।
चिंता नहीं चिंतन करो महाप्राण के अनुपम बोल।
व्यथा नहीं व्यवस्था हो जीवन बन जाए अनमोल॥
प्रशस्ति नहीं प्रस्तुति करो आत्मविजय प्रतिपल कण-कण में।
कलाकार साहित्यकार भाष्यकार भिक्षु दर्शन के।
आगम संपादन अनूठा ज्ञाता द्रष्टा अनुशीलन के॥
जीवन में संगीत गूंजता संगीतकार के पद वंदन में।
तपोयोग प्रतिबिम्बित प्रभु में बालयोग का नव आलोक।
भक्तियोग से दीपित कण-कण साम्ययोग का अद्भुत योग॥
निज पर शासन फिर अनुशासन देखा जगाने हर चिंतन में।