रचनाएं
नैतिकता का संवाहक
नैतिकता के संवाहक ने, गांव गांव, शहर शहर,
चरैवेति चरैवेति मंत्र को चरितार्थ कर,
"नैतिकता की पुनः प्रतिष्ठा" का संदेश दिया।
नैतिकता के संवाहक ने, जन-जन के कल्याण में,
अणुव्रत आंदोलन का शंखनाद कर,
आजाद भारत को चरित्र निर्माण का मंत्र दिया।
नैतिकता के संवाहक ने, बदलते परिवेश में,
बेड़ियों से जकड़ी नारी का उत्थान कर,
समाज कल्याण में, गगनचुंबी पंख लगा दिया।
नैतिकता के संवाहक ने, संघीय संपदाओं में,
दीक्षा, शिक्षा और कलात्मक विकास कर,
आध्यात्मिक वैभव का नव इतिहास बना दिया।
नैतिकता के संवाहक ने, भौतिकवाद की चकाचौंध में,
"संयम: खलु जीवनम्" को आत्मसात कर,
बाहर से भीतर यात्रा का प्रकाशपुंज दिया।
नैतिकता के संवाहक ने, मानवीय मूल्यों की रसधारा में,
साहित्य जगत को उपकृत कर,
आगम संपादन से आलोकित प्रकाश दिया।
नैतिकता के संवाहक ने, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में,
समण, उपासक, जैन संस्कारक श्रेणी का उद्भव कर,
सात समंदर पार महावीर का अनेकांत दर्शन दिया।
महाश्रमण के भाग्य विधाता ने,
भिक्षु तपोवन में शिष्य को सम्राट बना,
काम, क्रोध, मद, मोह पर प्रहार कर,
कालजयी श्री तुलसी ने,
अहं से अर्हं बनने का पथ अंगीकार किया।।