मस्त फकीरी पर है नाज

रचनाएं

साध्वी मुक्ताप्रभा

मस्त फकीरी पर है नाज

संघ सुमेरु महान सृजनहार, तुम्हें नमन है बार हजार।
संघ नायक संघ के सरताज, तुम्हारी मस्त फकीरी पर है नाज,
दुनिया याद रखेगी आज, सदियों गूंजेगी युगीन आवाज।
अंतरमन के रचनाकार, कौन सा चढ़ाऊ उपहार,
तुम्हें नमन है बार हजार।।
ज्ञान दाता भाग्यविधाता, श्रेयस्कर नवम् अधिष्ठाता,
आगम के अनुसंधाता, गणनंदन के नवोन्मेष निर्माता,
विलक्षण चिंतक विश्व विख्याता, प्रवचन पटुता के व्याख्याता,
दीपित भाल दीदार, हर संकल्प बना साकार,
तुम्हें नमन है बार हजार।।
सोई शक्ति जगाई तुलसी ने, सत्य साधना सिखाई तुलसी ने,
अणुव्रत का संदेश दिया तुलसी ने, अभ्युदय का द्वार खोला।
नूतन इतिहास रचा तुलसी ने, संघर्षों से कभी न मानी हार,
तुम्हें नमन है बार हजार।।
फूल गुलाब सी कोमल काया, चार तीर्थ पर था आपका साया,
कल्पतरु सी मिली सुखद छाया, तुलसी जिसमें जिसने मन लगाया,
उसने सब कुछ पाया ही पाया, हे जन-जन के तारणहार,
तुम्हें नमन है बार हजार।।
कलुष निकंदन वदना नंदन, चरणों में करते अभिनंदन,
सकल विश्व के तीर्थ धाम, गुण परिमल पावन सुखराम,
अनुपम, अतुल, अभूतपूर्व आनंद, कर दो भवसागर पार,
तुम्हें नमन है बार हजार।।