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जैनियों और तेरापंथियों का ही नहीं जन-जन का कल्याण किया गुरुदेव तुलसी ने
आचार्य श्री तुलसी एक पंथ के आचार्य होते हुए भी उन्होंने जन कल्याण के लिए जो अनवरत कार्य किये वे सबके लिए प्रशंसनीय ही नहीं अनुकरणीय हैं। इसीका सुपरिणाम मान सकते हैं कि उनके पावन सान्निध्य में हर पंथ के संत महंत हर वर्ग के अग्रणी नेता चाहे वे राजनीति से जुड़े हों या उद्योग जगत से जुड़े हो बड़ी ही आत्मीयता से आते। उपासना से प्राप्त सद् उपदेश को अपने जीवन में ही नहीं अपने सम्पर्क में आने बालों को भी बताते कि इन्हें आत्मसात करो जिससे जीवन जीने का आनंद आ सके। गुरुदेव के मुख्य तीनों आयाम अणुव्रत, प्रेक्षाध्यान, जीवन विज्ञान जितने जैनी और तेरापंथियों के लिए उपयोगी सिद्ध हुए उतने अन्य लोगों के लिए भी उपयोगी बने हैं। तेरापंथ का सौभाग्य है कि तेरापंथी लोगों को समयानुसार आचार्य प्राप्त होते रहे हैं जिससे यह धर्म संघ उत्तरोत्तर गतिमान बना हुआ है। इस संघ के प्रथम आचार्य आचार्य भिक्षु हुए उन्होंने संघ विकास के लिए एक गुरु एक विधान जो मर्यादा बनाई वह आज भी सैकड़ों वर्षों बाद भी अक्षुण्ण रूप से चल रही है। इस संघ की बड़ी विशेषता है कि आचार्य द्रव्य, क्षेत्र, काल ओर भाव के अनुसार चलते हैं यही महावीर का अनेकांत है। ऐसा ही नहीं ऐसा भी हो यह चिंतन व्यक्ति को सदा उन्नत बनाने वाला है। आठ आचार्यों ने जो परिवर्तन नहीं किया वह आचार्य श्री तुलसी ने किया परन्तु उसका अधिकांश सर्वत्र स्वागत ही हुआ है तभी यह धर्मसंघ देश विदेश में अपनी पहचान बना पाया है। आचार्य श्री तुलसी ने हर वर्ग हर वर्ण के उत्थान का कार्य बिना किसी स्वार्थ के किया। उन्हें कोई वोट, नोटओर प्लॉट की आवश्यकता नहीं थी बल्कि हर व्यक्ति अमन-चैन की जिंदगी जीये जिससे परिवार समाज राष्ट्र और विश्व का कल्याण हो सके। उनका चिंतन था कि सम्प्रदाय भले भिन्न हो, परंतु व्यक्ति के दिल दिमाग में साम्प्रदायिकता हावी न हो। कैसे व्यक्तियों का जीवन स्वच्छ सरल सरस बने जिससे आपसी वैमनस्य न बढ़े। इसके लिए उन्होंने अनेक प्रयास किये और अधिकतर प्रयास सफल रहे।
आज हम जब अन्य संप्रदाय के अग्रणियों के साथ कार्यक्रम करते हैं तब यह स्वर सुनने मिलता है कि आचार्य श्री तुलसी एक सिद्ध पुरुष थे जिन्होंने भाईचारा का माहौल बनाया जो स्वस्थ समाज राष्ट्र के लिए नितांत आवश्यक था। हम उनके पुण्य दिवस पर यह मंगल कामना करते हैं कि आपके बताये हुए मार्ग का दृढ़ निष्ठा से सदा अनुकरण करते रहेंगे।