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नवकार महामंत्र अनुष्ठान
युगप्रधान, शांतिदूत, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी पुण्यप्रज्ञाजी के सान्निध्य में नवकार महामंत्र का भव्य अनुष्ठान करवाया गया। अनुष्ठान के पश्चात साध्वी पुण्यप्रज्ञाजी ने अपने मंगल उद्धबोधन में कहा कि नवकार महामंत्र जैनों का सार्वभौम मांगलिक मंत्र है। इस मंत्र में कई धर्मों की उत्कृष्ट प्रेरणा है। इस मंत्र में जैन तीर्थंकरों का स्मरण करने से तथा वीरतापूर्ण आदर्शों द्वारा प्रेरित होने से यह उनके उपासक व्यक्तियों के जागरण के साथ-साथ नैतिक सिद्धियों की प्राप्ति में सहायक है। इस महामंत्र में निर्वाणी, कार्यक्षेत्र, कल्पवृक्ष, चिंतन-हरण के निर्देश व दृष्टियों का भंडार निहित है। साध्वी विनीत प्रज्ञाजी ने जैन दर्शन में व्यख्त महामंत्र नवकार की संक्षिप्त व्याख्या करते हुए कहा – नवकार महामंत्र में चौदह पूर्वों का सार है। महामंत्र से आधि, व्याधि और उपाधि की समस्याओं का समाधान होता है। साध्वी वृन्द में साध्वी दृष्टिप्रज्ञाजी, साध्वी विनीतप्रज्ञाजी सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित थीं। सभा अध्यक्ष उत्तम बरलोटा, तेयुप अध्यक्ष निखिल कोठारी, महिला मंडल अध्यक्षा हेमलता बाफना उपस्थित थे।