णमोत्थुणं रहस्य कार्यशाला का आयोजन

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घाटकोपर।

णमोत्थुणं रहस्य कार्यशाला का आयोजन

मंत्रद्रष्टा आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री जी के पावन सान्निध्य में णमोत्थुणं रहस्य कार्यशाला आयोजित हुई। उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए विदुषी साध्वी निर्वाण श्री जी ने कहा - मणी, मंत्र और औषधियों का प्रभाव अचिंत्य होता है। श्रद्धा के साथ किया गया अनुष्ठान लाभदायी व यथेष्ट फलदायी होता है। मंत्र जप के लिए समय, स्थान व माला का सही निर्णय अपेक्षित है। जैन धर्म के प्रभावक मंत्रों में ‘णमोत्थुणं' का अपना स्थान है। कार्यशाला की मुख्य वक्ता साध्वी योगक्षेमप्रभाजी ने कहा- जिस मंत्र का जप करे, चित्त को तदाकार बना लें। मंत्र के साथ भावना का अत्यंत महत्त्व है। मंत्र की शक्ति के साथ जब प्रयोक्ता की शक्ति जुड़‌ती है, एक चमत्कार घटित होता है।
'णमोत्थुणं' सूत्र में अनेक छोटे-बड़े मंत्र है, जिनका प्रभाव विस्मयकारी है। साध्वी योगक्षेमप्रभाजी, साध्वी लावण्यप्रभाजी, साध्वी कुंदनयशाजी, साध्वी मुदितप्रभाजी एवं साध्वी मधुरप्रभाजी 'नमोस्तु तीर्थंकर भगवान' गीत से तीर्थंकर की स्तुति की। कार्यक्रम का शुभारंभ महामंत्र के समुच्चार से हुआ। तेयुप अध्यक्ष राकेश सुराणा ने साध्वी श्री के प्रति आदरभाव प्रकट करते हुए सबका स्वागत किया। तेयुप मंत्री कांति मेहता ने सबके प्रति आभार प्रकट किया। इस विशेष कार्यशाला में 250 से अधिक भाई- बहनों की उपस्थिति उत्साहवर्धक रही।