रचनाएं
स्व. साध्वी आशावती जी के प्रति हृदयोद्गार
आशावती सती बनी, मन मजबूती धार
तुलसी मुख संयम ग्रहण, धन्य उभय परिवार ॥१॥
चाँदकँवर जी साथ में, करती धर्म प्रचार
उनकी सेवा अंत तक, की मन हर्ष अपार ॥२॥
अशाता वेदनीय को, सहन किया चिरकाल
सेवा सतियों की सतत, पाकर हुई निहाल ॥३॥
महाश्रमण गुरुदेव की, करुणा अपरम्पार
सेवा त्रिशला साध्वी की, सुगुरु कृपा अनुसार ॥४॥
गंगाणे के भक्त हैं, सजग सदा दिन रात
आये हैं हम देखकर, शंका की क्या बात ॥५॥
स्मृति सभा में कर रहे, सतिवर के गुणगान
कमल हृदय की भावना, शीघ्र वरें शिवस्थान ॥६॥