रचनाएं
साध्वीश्री आशावती जी ने कर ली नैया पार
साध्वीश्री आशावती जी ने कर ली नैया पार।
सार जीवन का निकाला, पा संयम रत्न निराला।।
भिक्षु भूमि केलवा में तुलसी गुरु से दीक्षा पाई थी
शासन माता की सह दीक्षित बनकर गण मे आई थी
चांदकुमारी जी के तन की पछेवड़ी कहलाई।। सार...
अपनी सूझबूझ से पति और परिकर से आज्ञापत्र पाया था।
बैद और भूरा दोनों कुल का ही मान बढ़ाया था।
नोखा मंडी की प्रथम दीक्षा ले ख्यात मे नाम लिखाया।। सार..
संबोधन शासन श्री का, पूज्य प्रवर ने बरसाया था।
अप्रमत्त रहते पल-पल, स्वाध्याय तप जप भी सवाया था।
उवसम सारं खूं सामण्णं था जीवन श्रृंगार।। सार...
गुरु त्रय की शासना में 66 वर्षों तक की साधना।
तन मे हो प्राण जब तक करती रहूं मैं प्रभु आराधना।
उपयोगी मैं बनी रहूं, उन्नत आचार विचार।। सार...
तर्ज - मिलो न तुम तो हम