‘उल्लास’ कार्यशाला का आयोजन

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घाटकोपर।

‘उल्लास’ कार्यशाला का आयोजन

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्रीजी ठाणा- ६ के पावन सानिध्य में ते.म.मं.घाटकोपर द्वारा 'उल्लास' कार्यशाला का आयोजन किया गया। विदुषी साध्वी निर्वाण श्रीजी ने कहा- जीवन में उल्लास का स्थान देह में प्राण के समान है। आनंद विहीन जीवन एक उपहार नहीं भार बन जाता है। उल्लास का एहसास हो इसके लिए नकारात्मक भावों से ऊपर उठना जरूरी है। जीवन में संवादिता हो तो शांति का साम्राज्य रहता है, जहां विवाद होता है, वहां जिंदगी दुःखद बन जाती है। अतः वाद-विवाद, टी.वी, मोबाईल आदि से दूर रहकर असली आनंद पाए। प्रबुद्ध साध्वी डा. योगक्षेमप्रभाजी ने बताया प्रतिपल उल्लास पाने के लिए शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक फिटनेस जरूरी है। मंजू बड़ाला ने साध्वीश्री के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। साध्वी योगक्षेम प्रभाजी, साध्वी लावण्यप्रभाजी, साध्वी कुंदन यशाजी, साध्वी मुदितप्रभाजी एवं साध्वी मधुरप्रभाजी ने गीत का मधुर संगान किया। धन्यवाद ज्ञापन तेममं मंत्री नीतू डांगी ने किया।