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तेरापंथ मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के निर्देशन में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा 3 के सानिध्य में तेरापंथ : मेरापंथ कार्यशाला का सफल आयोजन उत्तर हावड़ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा तेरापंथ भवन में किया गया। कार्यशाला में मुख्य प्रवक्ता सूर्यप्रकाश सामसुखा (राष्ट्रीय संयोजक: उपासक श्रेणी) थे। कार्यशाला में लगभग 225 व्यक्तियों ने संभागिता दर्ज की। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में उद्बोधन प्रदान करते हुए मुनि जिनेश कुमारजी ने कहा - आचार्य भिक्षु ऊर्जा के महान स्रोत थे। वे आत्मोदय के उत्प्रेरक थे। वे सत्य के पुजारी, अलौकिक चेतना के धनी, महान संत व तेजस्वी आचार्य थे। उनका जीवन संघर्षों से ओतप्रोत था। वे संघर्षों की आंधी में भी चट्टान की तरह सत्य पर अडिग रहे। वे क्रांतचेता युग पुरुष थे। उन्होंने तत्कालीन धर्म क्षेत्र में शिथिलता के प्रति क्रांति का शंखनाद किया। उनकी धर्मक्रांति आचार, विचार व अनुशासन गत थी। उनकी धर्मक्रांति ही तेरापंथ के रूप में विख्यात हुई।
आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष में भिक्षु विचार दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए तेरापंथः मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन सभा द्वारा किया जा रहा है। इस कार्यशाला के माध्यम से सभी आचार्य भिक्षु के विचारों से परिचित होकर और अधिक आस्थाशील बनें। प्रवक्ता सूर्यप्रकाश जी ने भी अच्छे ढंग से प्रशिक्षण दिया ये साधुवाद के पात्र हैं। मुनिश्री ने उपस्थित धर्मसभा को दान विषय पर विस्तार से जानकारी प्रदान की। मुनि कुणाल कुमार जी के सुमधुर संगान से कार्यक्रम का मंगलाचाण हुआ। स्वागत भाषण उत्तर हावड़ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष संदीप डागा ने दिया। अतिथि परिचय उपासक सुशील जी बाफना ने दिया। इस अवसर पर मुख्य प्रवक्ता सूर्यप्रकाश सामसुखा ने धर्म की पांच कसौटियां पर विस्तार से प्रकाश डाला। आभार ज्ञापन सभा के मंत्री विनीत कोठारी ने किया।