युगप्रधान गणाधिपति आचार्यश्री तुलसी की 30वीं पुण्यतिथि पर विशेष

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कांदिवली

युगप्रधान गणाधिपति आचार्यश्री तुलसी की 30वीं पुण्यतिथि पर विशेष

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी शिष्या 'शासनश्री' साध्वी विद्यावतीजी 'द्वितीय' ठाणा 5 के सान्निध्य में आचार्य तुलसी का 30वां महाप्रयाण दिन 'विसर्जन दिवस' के रूप में मनाया गया। नमस्कार महामंत्र का उच्चारण साध्वी वृंद द्वारा किया गया। तारा धाकड़ ने 'तुलसी अष्टकम्' से मंगलाचरण किया। साध्वी विद्यावतीजी ने उ‌द्बोधन में कहा- ग्यारह वर्ष की अल्पायु में दीक्षित होने वाला बालक तुलसी बाईस वर्ष की आयु में तेरापंथ के आचार्य के रूप में प्रतिष्ठित हो गये। उन्होंने लगभग 60 वर्ष के शासनकाल में कई महत्त्वपूर्ण अवदान दिये। समाज के लिए 'नया मोड़' का उद्‌घोष दिया और संपूर्ण मानव जाति के लिए अणुव्रत का संदेश दिया। अणुव्रत की मशाल लेकर आचार्य तुलसी ने चारों दिशाओं की यात्राएं की। उनके शासनकाल को स्वर्णिम शासनकाल कहा जा सकता है। साध्वी ऋद्धियशाजी ने वक्तव्य एवं साध्वी श्री मृदुयशाजी ने गीत प्रस्तुत किया। साध्वी वृंद की प्रेरणा से इस दिवस के उपलक्ष में आयंबिल का उपक्रम रखा गया। 61 भाई बहिनों ने आयंबिल तप किया। कार्यक्रम का संचालन साध्वी प्रेरणाश्रीजी ने कुशलता पूर्वक किया।