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स्पंदन कार्यशाला का आयोजन
तेरापंथ सभाभवन घाटकोपर के प्रांगण में स्पंदन कार्यशाला का सफल आयोजन हुआ। आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री जी के पावन सानिध्य में सुख-दुख के स्पंदनों की महत्ता पर विस्तार से विमर्श हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने कहा- सुख सबको प्रिय है। दुःख कोई नहीं चाहता। भीतर में शांति व सुख के स्पंदन जगाने का उपाय खोजना है। अध्यात्म के महान प्रवक्ता भगवान महावीर ने कहा- धर्म सब प्राणियों के लिए त्राण व शरण है। इससे एंडोर्फिन नामक रसायन स्वतः पैदा होता है, जो सुखानुभूति देता है। धर्म वह सकारात्मक भाव है, जो शुभ स्पंदन जगाता है। साध्वी डा. योगक्षेमप्रभा जी ने अपने प्रेरक वक्तव्य में कहा- हमारा जगत तरंगों का जगत है। नाना प्रकार के स्पंदन, प्रकंपन, कंपन पूरे वातावरण को प्रभावित करते हैं।
जीवन में शुभ स्पंदनों के जागरण से पारिवारिक जीवन में सुख-शांति का एहसास होता है। आध्यात्मिक उल्लास बढ़ता है। शुभ योग का विस्तार होता है। साध्वी कुंदनयशाजी, साध्वी योगक्षेमप्रभाजी, साध्वी लावण्यप्रभाजी, साध्वी मुदितप्रभाजी एवं साध्वी मधुर प्रभाजी ने मधुर गीत का संगान किया। तेरापंथी सभा के अध्यक्ष शांतिलाल कोठारी ने साध्वीश्री के प्रति अहोभाव व्यक्त करते हुए सबका स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापन कमलेश ढालावत ने किया। मंच संचालन तेममं मंत्री नीतू डांगी ने किया।