संस्थाएं
'कैसे खुश रहें?' विषयक व्यक्तित्व विकास कार्यशाला
आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेशकुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के निर्देशन में व्यक्तित्व विकास कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ युवक परिषद्, साउथ हावड़ा द्वारा तेरापंथ भवन में किया गया। कार्यशाला का विषय था — 'कैसे खुश रहें?' (व्यक्तित्व विकास)। इस अवसर पर मोटिवेशनल स्पीकर सुश्री पूजा रीतू बोथरा उपस्थित रहीं। इस अवसर पर उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए मुनि जिनेशकुमारजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में उपयोगी जीवन को ही खुशहाल जीवन माना गया है, जिसमें शांति, संतुष्टि, पवित्रता और आनंद हो। व्यक्ति का जितना अधिक मन शांत होगा, उतना ही वह खुश रहेगा। उपयोगी मन व्यक्ति को कम में भी संतुष्ट रहना सिखाता है। शांत मन के लिए विधायक भाव जरूरी है। विधायक भाव में व्यक्ति दुःख में भी सुख खोजता है, जबकि निषेधात्मक भाव में व्यक्ति सुख में भी दुःख खोजता है। व्यक्ति की जैसी सोच होती है, वैसा ही उसका व्यक्तित्व बन जाता है। इसलिए अपने चिंतन को स्वस्थ रखें। चिंता नहीं, चिंतन करें। ‘चिंता’ और ‘चिता’ दो शब्द हैं। चिता निर्जीव को जलाती है, जबकि चिंता सजीव को जलाती है। इसलिए व्यक्ति को कल की चिंता नहीं करनी चाहिए। वर्तमान में जीएं तो खुश रहेंगे। जब फोटो खिंचवाते हैं, उस समय चेहरे पर कितनी मुस्कान रहती है। हर समय यदि मुस्कराते रहेंगे तो जीवन खुशहाली से भर जाएगा। असीमित आकांक्षा व्यक्ति को अशांतता की ओर ले जाती है। अपरिग्रह व्यक्ति को खुशी से सरोबार कर देता है। पावनता, निर्मलता और आनंद से व्यक्ति तनावरहित रहता है। व्यक्ति हर समय सहिष्णुता का भाव रखे, छोटी-छोटी बातों में उलझे नहीं।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता सुश्री पूजा बोथरा ने खुश रहने के लिए भावुकता, जिज्ञासा वृत्ति, मैत्री, मिताहार, मित भाषण की चर्चा करते हुए गुरुदेव से मार्गदर्शन प्राप्त कर खुश रहने की कला सीखने की बात कही। कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ युवक परिषद, साउथ हावड़ा के सदस्यों के मंगलाचरण से हुआ। कार्यक्रम का संचालन मुनि परमानंद जी ने किया।