तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन

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कांदिवली।

तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन

युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या 'शासनश्री' साध्वी विद्यावतीजी 'द्वितीय' ठाणा 5 के सान्निध्य में तेरापंथ भवन कांदिवली में,तेरापंथ मेरा पंथ कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत साध्वी श्रीजी के नमस्कार महामंत्र संघान से की गई। स्वागत भाषण अध्यक्ष मिठालाल धाकड़ ने दिया। मंगलाचरण संगायक अशोक हिरण ने सुमधुर गीत के द्वारा किया। साध्वी प्रीयंवदाजी ने अपने उद्बोधन में कहा 'हम तेरापंथी है, लेकिन तेरापंथी है तो आपका मकसद क्या है? आपका लक्ष्य क्या है? क्या आप ये चाहते हो की मैं हिंसा करता जाऊं और उसमें मैं धर्म मानता जाऊं?मैं अधर्म की क्रिया करता जाऊं और उसी में मैं धर्म भी मान लूँ नहीं हो सकता।
हिंसा हिंसा ही है और अहिंसा अहिंसा ही है। चाहे आपने आवश्यक काम के लिए भी हिंसा की है तो भी वह हिंसा ही गिनी जाएगी।' साध्वी श्री मृदुयशा जी ने अपने वक्तव्य में शिथिलाचार साधुओं का चित्रण,दीक्षा के लिए प्रलोभन,दीक्षा दिलाने के तरीके व वर्तमान दीक्षा प्रणाली से तुलना तथा संस्था के इतिहास के बारे में बताया। सूरत से समागत प्रशिक्षक, प्रवक्ता, उपासक सुरेश कुमार जी बाफना ने तेरापंथ मेरा पंथ कार्यशाला के बारे में बताया की कार्यशालाएं व्यक्ति को जगाने के उद्देश्य से कराई जाती हैं। लोग भौतिकता की दृष्टि से जागे हुए हैं, पर अध्यात्म की दृष्टि से सोए हुए हैं। जागरण का संदेश देने मैं आचार्य महाश्रमण जी की किरण बनकर आया हूं।
यदि अब भी सो गए, तो कसूर गुरुदेव या सूर्य की किरण का नहीं, बल्कि स्वयं का होगा तथा हम जैन है तो क्यों है, तेरापंथी क्यों कहलाते हैं,दान,धर्म,कर्मके बारे में बताया व तेरापंथ ही मेरा पंथ हैं के बारे में विस्तृत जानकारी जीवन में होने वाली छोटी छोटी घटनाओं से जोड़ कर समझाया तथा उपस्थित श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर बहुत ही शालीनता के साथ दिये। कार्यशाला से पुर्व सभा पदाधिकारियों द्वारा सुरेश बाफना का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन व आभार ज्ञापन तेरापंथी सभा मंत्री विनोद कोठारी ने किया।