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मर्यादाएं तेरापंथ की प्रगति का आधार
तेरापंथ भवन में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि दीप कुमार जी ठाणा-2 के सान्निध्य में चतुर्दशी के अवसर पर हाजरी का प्रवचन आयोजित हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक वाणी का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।मुनि दीप कुमार जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि मर्यादाएं तेरापंथ धर्मसंघ की प्रगति और एकता का मूल आधार हैं। आचार्य भिक्षु ने युगीन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर मर्यादाओं का निर्माण किया तथा उनके उत्तरवर्ती आचार्यों ने उन्हें प्रतिष्ठित एवं पुष्ट बनाया। वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमण जी मर्यादाओं के पालन को विशेष महत्व देते हैं। उन्होंने कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ का समस्त कार्य एक गुरु की आज्ञा और निर्देशन में संचालित होता है। साधु-साध्वियों का विहार, चातुर्मास तथा संघीय गतिविधियां गुरु आज्ञा के अनुरूप सम्पन्न होती हैं।
आज के समय में, जब छोटे-छोटे परिवारों में भी अनुशासन बनाए रखना कठिन हो रहा है, तब तेरापंथ धर्मसंघ अनुशासन, संगठन और समर्पण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। मुनि श्री ने आचार्य भिक्षु के वचनों का स्मरण कराते हुए कहा कि जो व्यक्ति आज्ञा में चलता है, वही सच्चा भक्त होता है। केवल पूजा-अर्चना से नहीं, बल्कि आज्ञापालन से जीवन का वास्तविक कल्याण होता है। परिवारों में भी यदि सदस्य घर के मुखिया की उचित आज्ञा का पालन करें तो परिवार सुव्यवस्थित, सौहार्दपूर्ण और सुखी बन सकता है। मुनि काव्य कुमार जी ने कहा कि मर्यादा, अनुशासन और आत्मसंयम जीवन को उत्कृष्ट बनाने के प्रमुख सूत्र हैं। व्यक्ति जितना मर्यादित जीवन जीता है, उतना ही उसका व्यक्तित्व निखरता है और समाज में सद्भाव एवं समन्वय का वातावरण निर्मित होता है।