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दम्पती कार्यशाला का आयोजन
शासनश्री साध्वी कंचन प्रभाजी तथा शासनश्री साध्वी मंजु रेखाजी के सानिध्य में, तथा दादर महिला मण्डल के तत्वावधान में, नमस्कार महामंत्र से कार्य प्रारंभ कार्यशाला का आयोजन हुआ। 'साध्वी वृन्द के गीत 'जीवन स्वर्ग बनाए' इस मंगल गीत से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।' साध्वी कंचन प्रभाजी ने कहा, दम्पती, दम्पती परिवार की एक ताकत है। अनेक उतार-चढ़ाव के बावजूद भी परिवार के पोषण में अहं भूमिका निभाते हैं। शासनश्री मंजु रेखाजी ने कहा– 'सुहाना सफर' कार्यशाला, अपने आप में संस्कारों के सृजन के साथ घर-घर चेतना का दीया जला रही थी। आगे आपने कहा, बच्चों को अच्छे संस्कार देने की अहं भूमिका होनी चाहिए। ऐसी सुन्दर कार्यशालाएं संस्कृति की प्रतीक है। साध्वी निर्भय प्रभाजी ने महाप्राण ध्वनि से वातावरण आनंदमय बना दिया। साध्वी चेतनाश्री जी ने जो पूरे काम को कहा वह वाचन का हिस्सा है। इसका मतलब यही है संस्कार और सचाई जिन्दगी को पैदा करते हैं। साध्वी मंजुरेखाजी ने, २१ प्रश्नों के द्वारा पूरी ज्ञानशाला को एक नया उपहार दिया। महिला मण्डल की मंत्री स्नेहलताने आभार ज्ञापन किया।