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भिक्षुत्रय जन्म शताब्दी है, इस वीर भिक्षु का क्या कहना
भिक्षुत्रय जन्म शताब्दी है, इस वीर भिक्षु का क्या कहना।
श्रद्धा से शीश झुकाते हैं, इस परम पुरुष का क्या कहना॥
तेरस दिन भिक्षु आया था, तेरस दिन स्वर्ग सिधाया था।
ग्रह नक्षत्र सभी शुभ आये थे, इस अबुध तेरस का क्या कहना॥
माँ दीपा लाल दुलारे हो, बल्लूशा कुल उजियारे हो।
कंटालिय वाले प्यारे हो, इस पुण्य धरा का क्या कहना॥
भिक्षु का जाप निराला है, भिक्षु तप हीरत प्याला है।
भिक्षु की नित फेरें माला, इस भिक्षु नाम का क्या कहना॥
कितनों के कष्ट निवारे हैं, कितनों के काज संवारे हैं।
कितनों को पार उतारे हैं, इस तारणहार का क्या कहना
गण की तुम अमर निशानी हो, जन-जन के बने जुबानी हो।
पौरुष की प्रखर निशानी हो, इस वीर धीर का क्या कहना॥
गुलशन तेरा आबाद रहे, सावन भादव सी बहार बहे।
हर दिन हम मोद मनाते रहे, इस संघ चमन का क्या कहना॥
राहें सूनी आबाद करो, गुण सुमनों से भंडार भरो।
कुछ करने बस आशीषें दो, इस दिव्य पुरुष का क्या कहना॥
तर्ज - दुनिया में देव...