रचनाएं
भीखण से प्रीत मेरी जुड़ जाये
भीखण का नाम चमत्कारी, मंत्राक्षर-वत संकटहारी,
सांस-सांस में भीखण मेरे रम जाये।
'भीखण से प्रीत मेरी जुड़ जाये'
लौह पुरुष भीखण स्वामी, घट-घट ज्ञाता अन्तर्यामी,
सोते-उठते भीखण नाम जपते जाये।
राजनगर में ज्वर उठा, वंदन करना भी छोड़ दिया,
भीखण नाम से काम सिद्ध हो जाये।
आगम मंथन अर, चिंतन कर, पथ दिखलाया धीरज धर,
उन्हें समझाने संत भीखण चल जाये।
तेज ज्वर भी भीखण का उतर जाये।
श्रावक-गण सारे बोल उठे, वाह वाह वाह भीखण की छाती को,
बोधि पाकर भक्त सारे झुक जाये।
भीषण कष्टों को सहन किया, लौकिक-लोकोत्तर ज्ञान दिया,
भ्रांत धारणा के बादल छंट जाये।
ओरी अंधेरी दीप जला, धर्मक्रांति का बिगुल बजा,
सारी दुनिया में आलोक फैल जाये।
तृतीय शताब्दी वर्ष समापन है, जागो महाश्रमण भगवान है,
सारी दुनिया में भीखण नाम चमकाये।
तर्ज : प्राण प्राण में शांति