अणुव्रत व्याख्यानमाला का आयोजन

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अहमदाबाद।

अणुव्रत व्याख्यानमाला का आयोजन

साध्वी अणिमाश्रीजी के सान्निध्य में अणुव्रत विश्व भारती सोसाइटी के तत्त्वावधान में उस्मानपुरा स्थित गुजरात विश्वकोष-भवन में अणुव्रत समिति अहमदाबाद, अणुव्रत लेखक मंच एवं इन्स्टीट्यूट ऑफ जैनोलॉजी के संयुक्त तत्त्वावधान में ‘युद्ध, अहिंसा एवं अणुव्रत’ विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में साहित्यकार एवं जैन-दर्शन चिंतक पद्मश्री कुमारपालभाई देसाई तथा अणुव्रत लेखक मंच के संयोजक जिनेन्द्र कोठारी उपस्थित हुए। कार्यक्रम में भाई-बहनों की भारी उपस्थिति से पूरा हॉल खचाखच भर गया था। साध्वी अणिमाश्रीजी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा— 'आचार्य तुलसी ने असंप्रदायिक धर्म की व्याख्या कर मानवता की सुंदर भूमि पर अणुव्रत का दीप प्रज्ज्वलित किया, जिससे पूरी मानवजाति आलोकित हुई। अणुव्रत चरित्र निर्माण का एक व्यापक दर्शन है। इंसान के भीतर इंसानियत जागृत होने पर धरती से युद्ध व हिंसा का तांडव समाप्त हो जाएगा। युद्ध का सबसे महत्वपूर्ण कारण असंयम है, जबकि अणुव्रत संयम की बात करता है। यदि हर व्यक्ति में संयम की चेतना जाग जाए, तो युद्ध जैसी समस्याओं का स्वतः समाधान हो जाएगा।' उन्होंने आगे कहा कि कुमारपालभाई अनवरत ज्ञानोपयोग में रहने वाले व्यक्ति हैं, जिन पर तीनों आचार्यों (आचार्य तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञ व आचार्य महाश्रमण) की विशेष कृपा रही है। वे महावीर के दर्शन को जन-जन तक पहुँचाते रहें, यही मंगलकामना है। मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. कुमारपाल देसाई ने कहा— 'भारत के हजार वर्ष के इतिहास में आचार्य तुलसी व आचार्य महाप्रज्ञजी जैसी दुर्लभ जोड़ी मिलना कठिन है। आकाश का सूरज रोज धरती को आलोकित करता है, किंतु आचार्य तुलसी ने अणुव्रत रूपी ऐसा सूरज दिया जो मानव-मन के अंधेरे को दूर करता है। अणुव्रत नई दुनिया का सृजनहार है। अगर आदमी बदल जाए तो युद्ध की समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। आचार्य महाप्रज्ञजी एकमात्र ऐसे जैनाचार्य हैं, जिन्होंने अहिंसा समवाय की बात कही। हिंसा से नहीं, बल्कि अहिंसा से ही शांति आएगी।' उन्होंने साध्वी अणिमाश्रीजी के सान्निध्य में एक 'पीस कॉन्फ्रेंस' आयोजित करने का निवेदन भी किया। डॉ. साध्वी सुधाप्रभाजी ने पृष्ठभूमि पर चर्चा करते हुए कहा— 'आचार्य तुलसी ने चरित्र सम्पन्नता एवं नीति-निष्ठा की बुनियाद पर अणुव्रत आन्दोलन का सूत्रपात किया। उन्होंने मशाल हाथ में लेकर लाखों किलोमीटर की पदयात्रा की और लाखों लोगों को इस मिशन से जोड़ा।' कार्यक्रम में अणुव्रत लेखक मंच के राष्ट्रीय संयोजक जैनेन्द्र जैन ने मंच की जानकारी देकर आचार-संहिता का वाचन किया। नलिनी देसाई ने इन्स्टीट्यूट ऑफ़ जैनोलॉजी का परिचय दिया। समिति की अध्यक्ष डिम्पल श्रीमाली ने स्वागत भाषण दिया और आभार ज्ञापन मंत्री मनीषा दक ने किया। भिक्षु भजनमंडल ने अणुव्रत गीत के द्वारा मंगल संगान किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन अणुव्रत लेखक मंच के सहसंयोजक संतोष सुराणा ने किया।