मल्लाह कभी मल्लाह से मल्लाही नहीं लेता भैया! : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 18 जुलाई, 2026

मल्लाह कभी मल्लाह से मल्लाही नहीं लेता भैया! : आचार्यश्री महाश्रमण

अहिंसायात्रा प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी ने सुधर्मा सभा में उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को निर्धारित विषय ’’जहाज में सवारः पहुंचे भवपार’’ पर अमृत देशना प्रदान की। पूज्य प्रवर ने आगम के गूढ़ रहस्यों और रामायण के प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से जीवन रूपी नौका को सही दिशा देने का पाथेय दिया। शरीर ही हमारी नौका, विवेक से तय करें कि नौका छिद्रयुक्त है या निश्छिद्र!
१. औदारिक शरीर रूपी नौका: आचार्यप्रवर ने फरमाया कि यह संसार जन्म-मरण की परंपरा वाला एक महासमुद्र है और हमारा औदारिक शरीर इस समुद्र में तैरने वाली नौका है।
दो प्रकार की नौकाएँ: आगम में बताया गया है कि नौका दो तरह की होती है—एक 'आश्रव वाली' (छेदों वाली) जो समुद्र में डुबो देती है, और दूसरी 'निराश्रव' (बिना छेद वाली) जो सुरक्षित किनारे पर पहुँचा देती है।
२. अशुभ योग से बचें : यदि शरीर से पाप और अशुभ योग की प्रवृत्ति होती है, तो नौका में छेद हो जाते हैं जो कर्मबंध का कारण बनते हैं। संयमी जीवन, सम्यक्त्व (सम्यक दर्शन) और चारित्र के मेल से ही यह नौका बिना छेद वाली बनती है और मोक्ष तक ले जाती है।

केवट और श्रीराम का अद्भुत प्रसंग मल्लाह मल्लाह से मजदूरी नहीं लेता

पूज्य प्रवर ने केवट और भगवान श्रीराम की कथा का मर्मस्पर्शी संदर्भ देते हुए समझाया।
१. किराया चुकाने का आग्रह : जब श्रीराम ने गंगा पार कराने के बाद केवट से किराया देना चाहा ताकि वे ऋणमुक्त हो सकें, तो केवट ने बड़ी विनम्रता से मना कर दिया।
२. केवट का भावुक उत्तर : केवट ने कहा—'मल्लाह कभी मल्लाहों से मल्लाह ही लेते हैं भैया, मजदूर कभी मजदूरों से मजदूरी लेते हैं भैया।' मैंने आपको थोड़े से जल से पार कराया है, जब मेरी बारी आए तो आप मुझे इस भवसागर से पार लगा देना।
३. गुरु की शरण का महत्व : इस कहानी से आचार्यश्री ने संदेश दिया कि जैसे केवट ने श्रीराम से भवसागर पार लगाने की प्रार्थना की।
वैसे ही साधक को अपने गुरु और धर्माचार्य से आत्म-कल्याण का मार्ग पाना चाहिए।
२७ से ३१ जुलाई तक 'पंचरंगी तप' का बड़ा आह्वान
१. भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष : स्वामी भिक्षु के ३००वें जन्म वर्ष के समापन का समय निकट है। इस योगक्षेम वर्ष में आचार्यश्री ने श्रावक-श्राविकाओं के लिए २७ जुलाई से ३१ जुलाई तक पंचरंगी तप का विशेष कार्यक्रम घोषित किया।
२. कर्म निर्जरा का मार्ग : पूज्य प्रवर ने सभी को तपस्या में एक-एक कदम आगे बढ़ाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि तप भी शरीर रूपी नौका को बिना छेद की बनाने का पुरुषार्थ है, जिससे कर्मों की निर्जरा होती है।