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तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के निर्देशन मे तेरापंथ सभा,शिरपुर द्वारा 'तेरापंथ मेरा पंथ' कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला प्रशिक्षक सूरत से पधारे अर्जुन मेडतवाल (प्रवक्ता उपासक) ने नमस्कार महामंत्र का मंगल उच्चारण करते हुए कार्यशाला का शुभारंभ करवाया। तेरापंथ सभा अध्यक्ष पंकज गेलडा ने स्वागत वक्तव्य दिया। कार्यशाला में मार्गदर्शन देते हुए प्रशिक्षक अर्जुन मेडतवाल ने कहा - आचार्य भिक्षु हमारे आराध्य हैं। उन्होंने आगमों का गहन अध्ययन किया। धर्म क्षेत्र में व्याप्त शिथिलाचार को समाप्त करने का उन्होंने बीड़ा उठाया। उन्होंने जैन धर्म का जो विशुद्ध रूप जनता के सामने रखा उसीका नाम है तेरापंथ। वर्तमान वर्ष आचार्य श्री भिक्षु का जन्म त्रिशताब्दी वर्ष है। इस अवसर पर हमें तेरापंथ के दर्शन को गहराई से समझना चाहिए। उन्होंने जैन तत्व दर्शन तथा दान-दया के दो पक्ष लौकिक और लोकोत्तर के बारे में विस्तृत प्रकाश डाला। शुद्ध साध्य की प्राप्ति के लिए शुद्ध साधन की आवश्यकता व प्रतिमा पूजा के संबंध में तेरापंथ के दृष्टिकोण को भी विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने भिक्षु स्वामी के 3 दृष्टांत के जरिए धर्म की परिभाषा को सरल भाषा में समझाया।आगे जिज्ञासा समाधान का रोचक क्रम चला। तेरापंथ सभा के मंत्री दिनेश गेलडा ने आभार ज्ञापन किया। मंच संचालन कल्पेश गेलडा ने किया।