संस्थाएं
आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी का 107 वां जन्मदिवस पर विशेष
आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के 107 वें जन्मदिवस के आयोजन को संबोधित करते हुए मुनि प्रशांत कुमार जी ने कहा- स्वयं की साधना, गुरु के प्रति अदभुत समर्पण से शून्य से शिखर तक पहुंच गए महात्मा महाप्रज्ञ जी। गुरु निष्ठा एवं आत्मनिष्ठा से उनकी प्रज्ञा जागृत हुई।आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी एक महान अध्यात्म योगी संत थे। उनकी योग साधना अत्यंत गहन थी। स्वयं प्रयोगधर्मा पुरुष थे।आगम आधारित योग साधना के सूत्र को गहराई से आत्मसात कर स्वयं ने प्रयोग करके साधु साध्वी को प्रयोग करवाएं। प्रेक्षाध्यान पद्धति का अविष्कार किया। प्रेक्षाध्यान को वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया। ध्यान के विविध प्रयोग जनता के सामने प्रस्तुत किये। राजनीतिज्ञ, प्रशासनिक सामाजिक सभी स्तर के व्यक्तियों ने उनसे बहुत कुछ प्राप्त किया।उनका चिंतन हमेशा सकारात्मक रहा। मुनि कुमुदकुमार जी ने कहा- खुले आकाश में जन्म लेने वाले बालक नत्थु ने खुले आकाश जैसी ही विराटता को प्राप्त किया।विनय और गुरु के प्रति समर्पण के तो वे मूर्तिमान स्वरूप थे। तेरापंथ सभा अध्यक्ष मनोज पुगलिया, नेपाल बिहार सभा अध्यक्ष विरेंद्र संचेती,अभातेयुप कोषाध्यक्ष विकास बोथरा,तेरापंथ महिला मंडल से बबिता गिरिया,ने गीत एवं व्यक्तव्य के द्वारा अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम का संचालन मुनि कुमुद कुमार जी ने किया। आभार सभा मंत्री सुनील भंसाली ने किया।