आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी का 107 वां जन्मदिवस पर विशेष

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रोहिणी, दिल्ली

आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी का 107 वां जन्मदिवस पर विशेष

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या शासन श्री साध्वी सुमनश्री जी के सानिध्य में प्रेक्षाप्रणेता आचार्य श्री महाप्रज्ञजी का 107 वां जन्म दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ महावीर अष्टकम् से हुआ। शासन श्री साध्वी सुमनश्री जी ने अपने उद्बोधन में कहा-आचार्य महाप्रज्ञ जी का जीवन दर्शन एक व्यक्ति नहीं विचार है, सागर नहीं महासागर है। उन्होंने मानवजाति के लिए ऐसे दो बड़े अवदान दिये है जिसमें जीवन भी अनेक समस्याओं का समाधान समाहित है। प्रेक्षा ध्यान और जीवन विज्ञान के प्रशिक्षण और प्रयोगों से जीवन में अवश्य बद‌लाव आता है। आचार्य महाप्रज्ञजी महान् साहित्यकार चिंतक दार्शनिक ही नहीं महान् योगी महावीर वाणी के भाष्यकार थे। साहित्यकारों की विद्ववानों की दृष्टि में आधुनिक युग के विवेकानन्द थे। साहित्य सृजन से जैनधर्म का जन धर्म बनाया और भगवान महावीर के सिद्धान्तों को सुदूर देशों तक पहुँचाया। वो वीतराग तुल्य थे और बचपन से ही प्रज्ञा सम्पन थे। साध्वी मधुर लता ने 'गुरुवर हमारे जैन जगत के सितारे' मधुर संगीत से तावरण को भावविभोर बना दिया। मंगल पाठ से कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।