आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी का 107 वां जन्मदिवस पर विशेष

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आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी का 107 वां जन्मदिवस पर विशेष

आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी का 107वां जन्म दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ 'प्रज्ञा दिवस' के रूप में मनाया गया। यह भव्य एवं मांगलिक कार्यक्रम साध्वी राकेश कुमारी जी आदि ठाणा-4 के पावन सानिध्य में गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इसके पश्चात वरिष्ठ उपासक गंभीरमल ने आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के जीवन-वृत्त, उनके दर्शन और समाज के प्रति उनके महान अवदानों पर विस्तृत प्रकाश डाला। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए साध्वी मलयविभाजी ने आचार्य प्रवर के जीवन से जुड़े कई प्रेरक और रोचक प्रसंग साझा किए, 'नथमल' से 'महाप्रज्ञ' बनने की ऐतिहासिक यात्रा का मुख्य प्रवचन में पूज्य साध्वी राकेश कुमारी जी ने आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की प्रज्ञा, ध्यान साधना और अद्भुत अध्यात्म यात्रा को रेखांकित किया। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'पूज्य गुरुदेव वास्तव में प्रज्ञा के अक्षय धनी थे। उन्होंने अपने महान गुरुओं—आचार्य श्री कालूगणी जी एवं आचार्य श्री तुलसी जी के सानिध्य में रहकर अपने जीवन को विकास के सर्वोच्च शिखरों तक पहुँचाया।'साध्वी जी ने आगे कहा कि गुरुकृपा, समर्पण, विनम्रता, सरलता और अनवरत योग साधना के बल पर ही एक साधारण बालक 'नत्थू' (नथमल) से जैन शासन के महान 'महाप्रज्ञ' बनने की ऐतिहासिक यात्रा संभव हो सकी। उनका जीवन हर साधक के लिए एक जीवंत मार्गदर्शिका है।